राष्ट्रीय जनादेश न्यूज़

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के इलाज में दवाओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। डिप्रेशन से जूझ रहे कुछ लोगों को मनोचिकित्सा के साथ दवाओं की भी जरूरत पड़ती है। इन दवाओं को एंटी-डिप्रेसेंट कहा जाता है। इनका उद्देश्य उदासी, निराशा, रुचि में कमी और रोजमर्रा के काम करने में होने वाली कठिनाइयों जैसे लक्षणों को कम करने में मदद करना है। हालांकि, दवा शुरू करने के बाद सुधार आने में समय लग सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक उपचार के दौरान कुछ लोगों को ऐसे बदलाव महसूस हो सकते हैं, जिन पर डॉक्टर से चर्चा करना जरूरी है।
एंटी-डिप्रेसेंट लेने के बाद तुरंत सुधार क्यों नहीं होता?
डिप्रेशन का उपचार हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों को दवा शुरू करने के शुरुआती हफ्तों में नींद या भूख में सुधार महसूस हो सकता है, जबकि मनोदशा और दैनिक गतिविधियों में स्पष्ट बदलाव आने में ज्यादा समय लग सकता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (NIMH) के अनुसार, एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं का पूरा लाभ महसूस होने में अक्सर 4 से 8 सप्ताह लग सकते हैं।
इन दवाओं का असर मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संदेश पहुंचाने वाली प्रक्रियाओं पर पड़ता है। सेरोटोनिन और नोरएड्रिनेलाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर मूड, ध्यान, नींद और ऊर्जा से संबंधित मस्तिष्क की गतिविधियों में भूमिका निभाते हैं। कुछ दवाएं इन रासायनिक संदेशवाहकों के दोबारा अवशोषण को कम करती हैं, जिससे उनके संकेतों में बदलाव आता है।
हालांकि, डिप्रेशन को केवल किसी एक रसायन की कमी से समझना सही नहीं है। आनुवंशिक प्रवृत्ति, जीवन की परिस्थितियां, तनाव और अन्य जैविक व मनोवैज्ञानिक कारक भी इसमें योगदान दे सकते हैं।
क्या लंबे समय तक दवा लेना जरूरी होता है?
एंटी-डिप्रेसेंट की अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि मरीज में लक्षण कितने गंभीर हैं, उपचार से कितना फायदा हुआ है और पहले कितनी बार डिप्रेशन की समस्या सामने आ चुकी है। कुछ लोगों को सीमित अवधि तक उपचार की जरूरत होती है, जबकि बार-बार डिप्रेशन होने या लक्षण लौटने का जोखिम अधिक होने पर डॉक्टर लंबे समय तक दवा जारी रखने की सलाह दे सकते हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि लंबे समय तक दवा लेने से हर व्यक्ति को नुकसान होगा। सही दवा, उचित खुराक और नियमित चिकित्सकीय निगरानी के साथ कई लोग लंबे समय तक उपचार लेते हैं। दवा जारी रखने या बंद करने का फैसला लाभ और संभावित जोखिमों का आकलन करके किया जाता है।
यदि उपचार के दौरान अपेक्षित सुधार नहीं होता या परेशानी बढ़ती है, तो डॉक्टर से दोबारा संपर्क करना चाहिए। खुद से खुराक बढ़ाना या दवा बदलना उचित नहीं है।
शरीर में दिख सकते हैं ये बदलाव
एंटी-डिप्रेसेंट के दुष्प्रभाव दवा के प्रकार और व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रिया के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ प्रभाव शुरुआती दिनों में दिखाई देते हैं और समय के साथ कम हो जाते हैं। वहीं, कुछ समस्याएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं।
वजन और भूख में बदलाव: कुछ दवाएं भूख बढ़ा सकती हैं और लंबे समय में वजन बढ़ने से जुड़ी हो सकती हैं। दूसरी दवाओं के साथ भूख कम होने या वजन घटने की समस्या भी हो सकती है। इसलिए उपचार के दौरान वजन में लगातार बदलाव होने पर डॉक्टर को बताना चाहिए।
नींद और थकान: कुछ लोगों को दिन में सुस्ती, थकान या नींद आने की शिकायत हो सकती है। दूसरी ओर, कुछ दवाओं के साथ अनिद्रा या बेचैनी महसूस हो सकती है। दवा के कारण दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहा हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
यौन स्वास्थ्य पर प्रभाव: कुछ एंटी-डिप्रेसेंट यौन इच्छा कम होने या यौन क्रिया के दौरान कठिनाई पैदा कर सकती हैं। कुछ लोगों में ये समस्याएं उपचार के लंबे समय बाद भी बनी रह सकती हैं। ऐसे लक्षणों को छिपाने के बजाय डॉक्टर से खुलकर चर्चा करनी चाहिए, ताकि उपचार के दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा सके।
अन्य शारीरिक समस्याएं: मतली, सिरदर्द, मुंह सूखना और पाचन संबंधी परेशानियां भी कुछ दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव हैं। इसके अलावा, दूसरी दवाओं या सप्लीमेंट्स के साथ लेने पर प्रतिकूल प्रतिक्रिया का खतरा हो सकता है।
दवा अचानक बंद करना क्यों सही नहीं है?
यदि किसी व्यक्ति को दवा से फायदा महसूस होने लगे या दुष्प्रभाव परेशान करने लगें, तो वह उपचार बंद करने के बारे में सोच सकता है। लेकिन एंटी-डिप्रेसेंट को अचानक बंद करने से चक्कर, मतली, बेचैनी, नींद में परेशानी और फ्लू जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों को शरीर में असामान्य संवेदनाएं भी महसूस हो सकती हैं।
ये लक्षण दवा बंद करने से जुड़ी प्रतिक्रिया हो सकते हैं। इन्हें डिप्रेशन के दोबारा लौटने से अलग पहचानना जरूरी है। इसलिए खुराक कम करने या दवा बंद करने की प्रक्रिया डॉक्टर की निगरानी में होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर खुराक को धीरे-धीरे घटाने की योजना बनाते हैं।
दवा शुरू करने के बाद मनोदशा अचानक बिगड़ने या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आने पर तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। ऐसी स्थिति में नियमित अपॉइंटमेंट का इंतजार नहीं करना चाहिए।
इलाज में दवा के साथ क्या है जरूरी?
डिप्रेशन का उपचार केवल दवा तक सीमित नहीं है। कई लोगों को मनोचिकित्सा, खासकर संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT), से भी लाभ मिल सकता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दवा और मनोचिकित्सा का संयोजन सुझा सकते हैं।
नियमित नींद, शारीरिक गतिविधि, संतुलित दिनचर्या और भरोसेमंद लोगों का सहयोग उपचार में मददगार हो सकता है। हालांकि, गंभीर लक्षणों की स्थिति में केवल जीवनशैली में बदलाव को पर्याप्त उपचार नहीं मानना चाहिए।
लगातार उदासी, पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि खत्म होना, निराशा, नींद या भूख में बदलाव और रोजमर्रा के कामों में कठिनाई जैसे लक्षण बने रहें, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सही उपचार और नियमित निगरानी के जरिए लक्षणों को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है।
जयपुर में MNIT के पास मिला लेपर्ड शावक का शव शरीर पर चोट के निशान नहीं, भूख से मौत होने की आशंकाजयपुर | 27 अक्टूबर 2026 | राष्ट्रीय जनादेश
जयपुर में मालवीय नगर स्थित मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNIT) के पास एक लेपर्ड शावक का शव मिलने से वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। शावक के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिलने की बात सामने आई है। शुरुआती आशंका जताई जा रही है कि भोजन की कमी के कारण उसकी मौत हुई हो सकती है।
चोट के निशान नहीं मिलने से बढ़ी जांच की जरूरत
शावक का शव मिलने की सूचना के बाद मामले में मौत के कारणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शरीर पर बाहरी चोट के निशान नहीं मिलने से भूख या कमजोरी जैसी संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम अथवा वन विभाग की जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
वन्यजीवों की सुरक्षा पर सवाल
जयपुर और आसपास के वन क्षेत्रों में लेपर्ड की मौजूदगी के कारण मानव बस्तियों के नजदीक वन्यजीवों की गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। ऐसे मामलों में शावकों की सुरक्षा, भोजन की उपलब्धता और उनके प्राकृतिक आवास की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण होती है।
फिलहाल शावक की मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि उसकी मौत भूख, बीमारी या किसी अन्य कारण से हुई।
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दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस और INDIA गठबंधन की रैली को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष इसे कथित ‘वोट चोरी’ और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाने का मंच बता रहा है, तो दूसरी ओर दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने दिवाली से ठीक पहले रैली आयोजित करने पर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि बड़ी भीड़, ट्रैफिक डायवर्जन और आवाजाही पर संभावित पाबंदियों से त्योहार के दौरान होने वाला कारोबार प्रभावित हो सकता है।
इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने व्यापारियों की अपील पर विचार करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व और विपक्षी गठबंधन के सहयोगियों से चर्चा के बाद समाधान निकाला जाएगा। हालांकि, 26 अक्टूबर तक रैली की तारीख बदलने का कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं हुआ था।
1 नवंबर को दिल्ली में रैली क्यों करना चाहती है कांग्रेस?
कांग्रेस और INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली का मुख्य मुद्दा चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं और मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के कारण पात्र मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है। गठबंधन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदान की निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बता रहा है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस अभियान को ‘वोट चोरी’ के आरोपों के खिलाफ राजनीतिक मुहिम के रूप में पेश किया है। पार्टी और गठबंधन के नेताओं की योजना दिल्ली में बड़ी संख्या में समर्थकों को जुटाकर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की है। गठबंधन ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली करने की घोषणा की है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘वोट चोरी’ विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप का राजनीतिक नाम है। इसे चुनावी गड़बड़ी साबित करने वाले अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं, बल्कि विपक्ष के दावे के तौर पर ही समझा जाना चाहिए।
खरगे के बयान पर क्या है विवाद?
रैली की तारीख पर विचार करने की बात कहने से अलग, खरगे का बिहार में दिया गया एक बयान भी चर्चा में है। 25 अक्टूबर को पटना में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में खरगे ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” यह टिप्पणी उस समय आई, जब कार्यक्रम में एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री के पद छोड़ने को लेकर आपत्ति जताई थी।
खरगे ने इसी कार्यक्रम में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर भाजपा तथा निर्वाचन आयोग पर आरोप भी लगाए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विपक्ष की एकजुटता की अपील की।
खरगे की प्रधानमंत्री पर की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ। इस विवाद का केंद्र उनके बयान की भाषा और राजनीतिक संवाद का स्तर है। हालांकि, इसे दिल्ली रैली की तारीख पर व्यापारियों की आपत्ति से अलग मुद्दे के रूप में देखना चाहिए। दोनों घटनाएं एक ही राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान सामने आई हैं, लेकिन उनके कारण और संदर्भ अलग हैं।
व्यापारियों ने रैली टालने की अपील क्यों की?
दिल्ली के व्यापारियों का कहना है कि 1 नवंबर की तारीख दिवाली के खरीदारी सीजन के लिहाज से बेहद अहम है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने का आग्रह किया है।
CTI के अनुसार, दिल्ली में धनतेरस के दौरान सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, ऑटोमोबाइल और अन्य सामान की खरीदारी से बड़े पैमाने पर कारोबार होता है। संगठन ने अनुमान जताया है कि धनतेरस के आसपास विभिन्न क्षेत्रों में करीब 25 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यह संगठन का अनुमान है, स्वतंत्र रूप से सत्यापित सरकारी आंकड़ा नहीं।
व्यापारियों की चिंता यह है कि त्योहार से पहले बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे समय में बड़ी रैली के कारण रास्तों पर बैरिकेडिंग, ट्रैफिक डायवर्जन या सार्वजनिक परिवहन में बदलाव हुआ, तो ग्राहक बाजारों तक पहुंचने से बच सकते हैं। इससे दुकानदारों के साथ-साथ छोटे व्यापारियों, कर्मचारियों और माल की आपूर्ति से जुड़े लोगों पर भी असर पड़ सकता है।
रामलीला मैदान के आसपास कौन से बाजार हैं?
CTI ने बताया कि रामलीला मैदान के करीब पांच किलोमीटर के दायरे में कई बड़े थोक और खुदरा बाजार हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, दरियागंज, कश्मीरी गेट और करोल बाग जैसे व्यावसायिक क्षेत्र शामिल हैं।
इन बाजारों में त्योहारों के दौरान दिल्ली के अलावा दूसरे शहरों से भी व्यापारी और ग्राहक आते हैं। व्यापारियों का तर्क है कि यदि यातायात बाधित होता है, तो केवल रैली स्थल के आसपास की दुकानें ही नहीं, बल्कि अन्य बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं।
CTI ने अक्टूबर में हुए प्रदर्शनों और यातायात संबंधी बाधाओं का हवाला देते हुए दावा किया कि व्यापारियों को पहले ही करीब 3,000 करोड़ रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ा। यह भी संगठन का दावा है; इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित वास्तविक नुकसान नहीं माना जाना चाहिए।
खरगे ने व्यापारियों की मांग पर क्या कहा?
खरगे ने 26 अक्टूबर को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें व्यापारियों की अपील मिली है और इस पर एक-दो दिन में विचार करके समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष जिस मुद्दे को उठा रहा है, वह जनता के अधिकारों से जुड़ा है।
उनका तर्क था कि यदि लोगों के मतदान के अधिकार पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर व्यापारियों और विद्यार्थियों सहित समाज के विभिन्न वर्गों पर पड़ सकता है। इसके बावजूद उन्होंने व्यापारियों की मांग पर विचार करने की बात कही।
अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस और INDIA गठबंधन रैली की तारीख बदलेंगे या 1 नवंबर को ही आयोजन करेंगे। व्यापारियों की मांग है कि कार्यक्रम दिवाली और भाई दूज के बाद हो, जबकि विपक्ष इस रैली को चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को उठाने का महत्वपूर्ण अवसर मान रहा है।
राजस्थान के मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की बहन पहली बार बनी सरपंच, जानें कितने वोटों से मिली जीत?राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की छोटी बहन ममता मीणा ने सरपंच पद पर जीत दर्ज की। ममता मीणा ने पहली बार सरपंच का चुनाव लड़ा और पहली बार में जीत हासिल की। उनकी जीत के बाद समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
अलवर। अलवर जिले की रामपुरा ग्राम पंचायत से कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की छोटी बहन ममता मीणा ने सरपंच पद पर जीत दर्ज की। उन्होंने 261 मतों के अंतर से जीत हासिल की। यहां दो प्रत्याशी मैदान में थे, ममता मीणा पहली बार सरपंच चुनी गई हैं। उनकी जीत के बाद समर्थकों में उत्साह का माहौल है। पंचायत चुनाव में मिली इस जीत को लेकर सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। बता दें कि खेरली-सौखर पंचायत समिति क्षेत्र की 24 ग्राम पंचायतों में घोषित चुनाव परिणामों के साथ ही गांवों की नई सरकार की तस्वीर साफ हो गई है।
शनिवार को मतदान के बाद देर रात से मतगणना के परिणाम आने शुरू हुए, जबकि बड़ी ग्राम पंचायतों के नतीजे रविवार सुबह तक जारी हो पाए। परिणाम घोषित होने के साथ ही विजयी प्रत्याशियों के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। कई गांवों में समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया। अब नवनिर्वाचित सरपंचों के सामने गांवों में विकास कार्यों को गति देने, मूलभूत सुविधाओं में सुधार करने और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी होगी।
जानिए कहां से कौन बना सरपंच?
अलवर जिले की समूची ग्राम पंचायत में अंजली चौहान ने 1387 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर पूरे क्षेत्र में सबसे बड़ी जीत हासिल की। वहीं, खेरली रेल ग्राम पंचायत में प्रशांतसिंह ने लगातार दूसरी बार सरपंच निर्वाचित होकर अपना दबदबा कायम रखा। यहां जीत का अंतर 182 मत रहा। रामपुरा ग्राम पंचायत में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की बहन ममता मीणा ने भी जीत दर्ज की। सौखर ग्राम पंचायत से हेमराज 757 मतों के अंतर से विजयी रहे। दांतिया में खुशबू सिसोदिया ने 563 मतों से, लाठकी नूनिया में शालिनी जाटव ने 525 मतों से तथा ढहरीन दातवाड़ लीली देवी ने 518 मतों से जीत हासिल की। खेड़ा कल्याणपुर में हेमराज मीणा 487 मतों से और सौखरी में रमा देवी 411 मतों से विजयी रहीं। नाटौज में ज्योति मीणा ने 305 मतों से, घोसराना में मंगल राम मास्टर ने 280 मतों से तथा डौरोली में संतोष सैनी ने 274 मतों से जीत दर्ज की। रामपुरा में ममता मीणा और मंगोलाकी में देवेन्द्र जाटव ने 261-261 मतों के अंतर से जीत हासिल की।
इसी प्रकार सालवाड़ी ग्राम पंचायत से विष्णु शर्मा 235 मतों से, पीपलखेड़ा से मुनेश मीणा 189 मतों से, पीतमपुरा से सपना यादव 182 मतों से, मक्खन का नगला से महेंद्र धवन 124 मतों से तथा दारौदा से सतीश शर्मा 112 मतों से विजयी रहे। गारू में आरती खंडेलवाल ने 74 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। कटैहड़ा में जगदीश मीणा और सहजपुरा में रेखा कुमारी 35-35 मतों से विजयी हुए, जबकि खौखर में सुमित्रा और बहरामपुर में वीरवती ने 34-34 मतों के अंतर से जीत हासिल की। रामपुरा-पाटन ग्राम पंचायत से वीणा देवी 251 मतों से विजयी रहीं।


तमिलनाडु में ₹100 करोड़ के कथित घोटाले का मामला, पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी की खबरराष्ट्रीय जनादेश (RJN)
दिनांक: 26 अक्टूबर 2026 | तमिलनाडु
आरोप—1,000 निजी स्कूलों से पार्टी फंड के नाम पर वसूली, बदले में मान्यता और अन्य सरकारी मंजूरियां देने का दावा
चेन्नई। तमिलनाडु में निजी स्कूलों को मान्यता और अन्य सरकारी मंजूरियां देने के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1,000 निजी स्कूलों से राजनीतिक पार्टी के फंड के लिए रकम वसूलने के आरोप लगाए गए हैं।
मामले में आरोप है कि निजी स्कूल संचालकों से विभिन्न प्रशासनिक स्वीकृतियों और मान्यता संबंधी प्रक्रियाओं के बदले पैसे लिए गए। इस कथित वसूली को पार्टी फंड से जोड़कर देखा जा रहा है।
स्कूलों की मान्यता और मंजूरियों पर सवाल
आरोपों के मुताबिक, निजी स्कूलों से रकम लेने के बदले उन्हें मान्यता सहित विभिन्न सरकारी मंजूरियां दिलाने की बात कही गई थी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह शिक्षा विभाग की मंजूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का मामला हो सकता है।
इस प्रकरण में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित रकम किन लोगों ने एकत्र की, उसका इस्तेमाल कहां हुआ और स्कूलों को मंजूरी देने की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं।
हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज, पूर्व मंत्री गिरफ्तार
इस मामले में तमिलनाडु के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री और डीएमके नेता अनबिल महेश पोय्यामोझी को सोमवार, 26 अक्टूबर को चेन्नई पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) ने गिरफ्तार कर लिया।
मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके कुछ घंटों बाद पुलिस ने उन्हें चेन्नई के अमिंजीकरई इलाके से गिरफ्तार किया।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
यह मामला तमिलनाडु के निजी स्कूल संगठनों से जुड़ी शिकायत के बाद सामने आया। आरोप है कि स्कूलों को स्थायी मान्यता, अपग्रेडेशन, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की मंजूरी तथा अन्य आवश्यक स्वीकृतियां दिलाने के नाम पर बड़ी रकम एकत्र की गई।
रिपोर्टों के अनुसार, 1,000 से अधिक स्कूलों से पैसे लेने के आरोप सामने आए हैं, जबकि जांच एजेंसियों ने अब तक 177 स्कूलों को कथित लेनदेन से जोड़ा है।
प्रवर्तन निदेशालय भी कर रहा जांच
मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू की है। एजेंसियां कथित रकम के लेनदेन और उसके इस्तेमाल का पता लगाने में जुटी हैं।
इस मामले में बी.टी. अरसकुमार और पूर्व विधायक मुथुकुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
पूर्व मंत्री ने आरोपों से किया इनकार
अदालत में पूर्व मंत्री की ओर से दलील दी गई कि उनके द्वारा अवैध रकम प्राप्त करने का कोई रिकॉर्ड नहीं है और उनके नाम का इस्तेमाल दूसरे व्यक्तियों ने किया। हालांकि, अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
राष्ट्रीय जनादेश विशेष: निजी स्कूलों की मान्यता और सरकारी मंजूरियों से जुड़े इस मामले में जांच जारी है। गिरफ्तारी हुई है, लेकिन पूर्व मंत्री और अन्य आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप अभी अदालत में सिद्ध होना बाकी हैं।
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होटल के अंदर चल रहा था अवैध खेल, मैनेजर समेत 7 गिरफ्तार, 69 हजार की राशि बरामदजयपुर। शहर में होटलों की आड़ में चल रही अवैध गतिविधियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सिंधी कैंप थाना पुलिस ने बनीपार्क के कांतिनगर स्थित होटल जिनेन्द्र पैलेस में दबिश देकर जुआ खेलते सात लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके से 69,780 रुपए की राशि के साथ 156 ताश के पत्ते, हिसाब की डायरी, रजिस्टर, पेन और दो कैलकुलेटर बरामद किए हैं। कार्रवाई में होटल मैनेजर रोहित वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, मैनेजर पर आरोप है कि उसने जुआ खेलने के लिए कमरा और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। जांच में यह भी सामने आया कि पकड़े गए कुछ आरोपी पहले भी इसी होटल में जुआ खेलने आ चुके थे।
पुलिस उपायुक्त जयपुर पश्चिम प्रशांत किरण ने बताया कि होटलों में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष टीम गठित की गई थी। पुलिस को 25 अक्टूबर 2026 को सूचना मिली कि होटल जिनेन्द्र पैलेस में मैनेजर की मिलीभगत से जुआ खेला जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने रात में होटल के अंदर दबिश दी। इस दौरान कमरा नंबर 207 में सात लोग जुआ खेलते मिले।
ये आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मौके से अक्षय प्रताप सिंह उर्फ लक्की, शिवराज, अमित गोयल, श्यामसुंदर, विष्णु शर्मा, किशन कुमार गुप्ता और सत्यम भाटी को गिरफ्तार किया। इनके पास से जुए में इस्तेमाल हो रही नकदी और ताश के पत्तों के अलावा हिसाब-किताब रखने के लिए इस्तेमाल की जा रही डायरी व रजिस्टर भी जब्त किए गए।
मैनेजर पर जुआरियों को सुविधा देने का आरोप
पुलिस के अनुसार, होटल मैनेजर रोहित वर्मा पर आरोप है कि उसने जुआ खेलने के लिए सात लोगों को एक ही कमरे में जगह दी और उन्हें गतिविधि संचालित करने की सुविधाएं उपलब्ध कराईं। पुलिस ने जुआ खेलने के आरोप में सात लोगों और कथित तौर पर जुआ खिलाने के लिए जगह उपलब्ध कराने के मामले में मैनेजर को गिरफ्तार कर राजस्थान पब्लिक गैंबलिंग ऑर्डिनेंस (RPGO) की धारा 3/4 के तहत कार्रवाई की है।
गिरफ्तार आरोपियों में जयपुर और जोधपुर के निवासी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, तीन आरोपी जोधपुर के रहने वाले हैं, जो जयपुर आकर अपने साथियों के साथ जुआ खेल रहे थे। पूछताछ में कुछ आरोपियों ने पहले भी इसी होटल में आकर जुआ खेलने की बात स्वीकार की है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि सिंधी कैंप क्षेत्र के होटलों में अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। इससे पहले 5 अगस्त 2026 को भी सिंधी कैंप इलाके के एक होटल में जुआ खेलने के मामले में कार्रवाई की गई थी। पुलिस का कहना है कि होटल मालिकों और संचालकों के साथ बैठक कर उन्हें अवैध गतिविधियां नहीं होने देने के लिए पाबंद किया गया है। इसके बावजूद होटल में जुआ खेले जाने की सूचना मिलने पर कार्रवाई की गई। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच का फोकस होटल में जुआ खेलने की गतिविधियों, मैनेजर की भूमिका और आरोपियों के बीच संपर्कों से जुड़ी जानकारी जुटाने पर है।

गंभीर मरीजों को बिना सूचना SMS अस्पताल रेफर नहीं कर सकेंगे!गंभीर मरीजों को बिना सूचना SMS अस्पताल रेफर नहीं कर सकेंगे!अटैच अस्पतालों के लिए लागू होगी नई व्यवस्था, जांच और इलाज के बाद ही रेफरल पर जोर
जयपुर, 26 अक्टूबर 2026।
राजधानी जयपुर में गंभीर मरीजों को सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल रेफर करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने की तैयारी है। इसके तहत अटैच अस्पतालों से मरीजों को बिना पूर्व सूचना रेफर करने पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा रही है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य गंभीर मरीजों के रेफरल के दौरान बेहतर समन्वय स्थापित करना और SMS अस्पताल पर अनावश्यक दबाव कम करना है। रेफर किए जाने वाले मरीज की स्थिति, अब तक की गई जांच और दिए गए उपचार की जानकारी संबंधित अस्पताल को उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
जांच और इलाज के बाद ही रेफरल
प्रस्तावित एसओपी के अनुसार, अटैच अस्पतालों में मरीज की प्राथमिक जांच और आवश्यक उपचार किया जाना जरूरी होगा। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए रेफरल का निर्णय लिया जाएगा और SMS अस्पताल को पहले से सूचना देकर मरीज की स्थिति से अवगत कराया जाएगा।
मरीजों को क्या होगा फायदा?
मरीज की बीमारी और स्थिति की जानकारी पहले से उपलब्ध होगी।
इलाज में देरी की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।
रेफर करने वाले और प्राप्त करने वाले अस्पतालों के बीच समन्वय बेहतर होगा।
जांच और उपचार से संबंधित जानकारी मिलने पर आगे के इलाज की तैयारी आसान होगी।
आपात स्थिति में प्राथमिकता जरूरी
गंभीर मरीजों के मामले में समय पर उपचार सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए रेफरल प्रक्रिया का उद्देश्य इलाज में देरी करना नहीं, बल्कि अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना होना चाहिए।
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झुंझुनूं के पिलानी में युवक की चाकू मारकर हत्या, आरोपी पति गिरफ्तारलिव-इन रिलेशनशिप में रह रही पत्नी के साथ सो रहा था युवक; रात 10 बजे कमरे में घुसकर किए ताबड़तोड़ वार
पिलानी (झुंझुनूं), 26 अक्टूबर 2026। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के पिलानी में एक युवक की चाकू मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि युवक एक महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था। घटना रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है। इस मामले में महिला के पति पर हत्या का आरोप है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
सोते समय युवक पर किया हमला
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, युवक अपनी लिव-इन पार्टनर के साथ कमरे में सो रहा था। इसी दौरान महिला का पति कथित तौर पर चुपचाप कमरे में दाखिल हुआ और युवक पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसकी मौके पर ही मौत होने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात के पीछे की वजह और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
इलाके में घटना की चर्चा
पिलानी में हुई इस वारदात के बाद इलाके में घटना को लेकर चर्चा है। पुलिस मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है और हत्या के कारणों का पता लगाने में जुटी है।
राष्ट्रीय जनादेश (RJN)
वेबसाइट: www.rashtriyajanadesh.info




शादाब खान और हारिस रऊफ की 10वें विकेट के लिए रिकॉर्डतोड़ 89 रन की साझेदारी के दम पर पाकिस्तान ने इंग्लैंड के खिलाफ रविवार रात बेहद ही रोमांचक जीत दर्ज की है। यह पारी तब आई जब मेजबान टीम लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में 242 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 154 रन पर 9 विकेट गंवाकर हार की कगार पर खड़ी थी। इस मैच जिताऊ पारी ने पाकिस्तानी कप्तान शाहीन अफरीदी को भी अपना मुरीद बना लिया है। उन्होंने इसकी तारीफ करते हुए कहा कि मैंने अपनी जिंदगी में कभी ऐसी पारी नहीं देखी।
इंग्लैंड के खिलाफ लगातार जीत और शादाब खान की मैच जिताने वाली पारी को लेकर क्या कहेंगे?
शाहीन अफरीदी ने इस पर कहा कि शादाब और हारिस, ने जिस तरह से 89 रन की पार्टनरशिप कर गेम खत्म किया, मैंने अपने करियर में कभी नहीं देखा। यहां तक कि जब मैं बच्चा था, तब से लेकर अब तक मैंने अपनी जिंदगी में कभी ऐसी पारी नहीं देखी। इसलिए एक कप्तान के तौर पर भी बहुत खुश हूं।
अराफात मिन्हास को 29वें ओवर से पहले क्यों नहीं लाया गया?
इस पर उन्होंने कहा कि देखिए, मुझे पता है कि दो लेफ्ट-हैंडर बैटिंग कर रहे थे। इसलिए मैं उन्हें उस समय नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता था। हमें लगा कि टीम में बॉलिंग में बहुत वेरिएशन है, इसलिए हम शादाब और फिर सलमान अली आगा को लाए। इसलिए हम अराफात का थोड़ा देर से लाए। इसलिए मुझे लगता है कि वह अच्छे थे, उन्होंने अच्छी बॉलिंग की।
गेंद और फील्डिंग में रजाउल्लाह के योगदान पर क्या कहेंगे?
हम बस रजाउल्लाह की पेस और बाउंसर चाहते हैं। उन्होंने हैरी ब्रूक को जिस तरह से रन आउट किया है, वह विकेट हमारे लिए जरूरी था और उन्होंने हमारे लिए बहुत अच्छा किया। अगले मैच के लिए टॉप-ऑर्डर में बदलाव होंगे या नहीं? इस पर उन्होंने कहा कि हां हो सकता है। हमें टॉप-ऑर्डर से कुछ रन चाहिए। हम संघर्ष कर रहे हैं। हमें पावरप्ले में अटैकिंग गेम की जरूरत है। मुझे उम्मीद है कि अगले कुछ गेम में हम टीम में वह एनर्जी लाएंगे।
हम लगभग गेम जीतने वाले थे’
वहीं, इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने कहा कि सच कहूं तो मुझे नहीं लगता कि हमने गेंदबाजी में कुछ गलत किया। हमने उन्हें रोकने के लिए बहुत अच्छा काम किया। हम लगभग गेम जीतने वाले थे। जाहिर है, हमने शायद बोर्ड पर ज्यादा रन नहीं लगाए, लेकिन लड़कों ने बॉल और फील्डिंग में जो मेहनत की, वह बिल्कुल जबरदस्त थी। मैं इससे ज़्यादा और कुछ नहीं मांग सकता था।
राजस्थान में 2 दिन बाद आंधी-बारिश की चेतावनी, अक्टूबर में भी गर्मी का असर बरकरारदिन का पारा 38 डिग्री के करीब, माउंट आबू और फतेहपुर में रातें सबसे ठंडी; मौसम में बदलाव के संकेत
जयपुर, 26 अक्टूबर 2026।
राजस्थान में अक्टूबर का महीना समाप्त होने की ओर है, लेकिन प्रदेश के कई इलाकों में दिन के समय गर्मी का असर अब भी बना हुआ है। अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने से लोगों को दिन में गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, रात के तापमान में गिरावट के कारण सुबह और देर रात मौसम अपेक्षाकृत ठंडा महसूस हो रहा है। इसी बीच प्रदेश में दो दिन बाद कुछ इलाकों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए लोगों की नजर अब मौसम विभाग के आगामी पूर्वानुमान पर टिकी है।
दिन में गर्मी, रात में ठंडक
राजस्थान में मौसम का मिजाज इन दिनों अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है। दिन के समय तेज धूप के कारण तापमान ऊंचा बना हुआ है, जबकि सूर्यास्त के बाद कई स्थानों पर ठंडक बढ़ने लगती है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में दिन और रात के तापमान में यह अंतर लोगों की दिनचर्या को भी प्रभावित कर रहा है।
प्रदेश के कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने से दोपहर के समय गर्मी महसूस हो रही है। वहीं, रात के समय तापमान में गिरावट के चलते हल्की ठंड का अहसास होने लगा है। मौसम के इस बदलाव के बीच लोगों को दिन में गर्मी और रात में ठंडक, दोनों परिस्थितियों के अनुसार अपनी दिनचर्या में बदलाव करना पड़ रहा है।
माउंट आबू और फतेहपुर में रातें ठंडी
राजस्थान के तापमान में क्षेत्रवार अंतर देखने को मिल रहा है। माउंट आबू जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र में रात के समय ठंडक अधिक महसूस होती है। वहीं, सीकर जिले का फतेहपुर भी कम रात्रि तापमान के लिए जाना जाता है। इन इलाकों में रात का मौसम प्रदेश के गर्म क्षेत्रों की तुलना में अधिक ठंडा रह सकता है।
रात के तापमान में गिरावट के कारण सुबह जल्दी घर से निकलने वाले लोगों को ठंडक महसूस हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग शहरों का वास्तविक न्यूनतम तापमान जानने के लिए मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों को देखना जरूरी है।
दो दिन बाद आंधी-बारिश की संभावना
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, राजस्थान में दो दिन बाद कुछ क्षेत्रों में मौसम बदल सकता है। संभावित बदलाव के दौरान आंधी चलने और बारिश होने की आशंका जताई गई है। यदि संबंधित इलाकों में मौसम सक्रिय होता है, तो दिन के तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है और गर्मी से राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, बारिश का प्रभाव पूरे प्रदेश में एक समान हो, यह जरूरी नहीं है। राजस्थान के अलग-अलग जिलों में मौसम की परिस्थितियां अलग रह सकती हैं। कहीं बादल छाने की संभावना हो सकती है, तो कहीं मौसम शुष्क बना रह सकता है। इसलिए जिलेवार पूर्वानुमान और चेतावनी को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।
किसानों और आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत
आंधी और बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों, पशुपालकों और खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। यदि किसी क्षेत्र के लिए आंधी की चेतावनी जारी होती है, तो तेज हवा के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों, कमजोर दीवारों और अस्थायी निर्माणों से दूर रहना चाहिए।
किसानों को भी कृषि कार्यों, फसल की सुरक्षा और खुले में रखे कृषि उपकरणों के संबंध में स्थानीय मौसम सलाह के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। बारिश की वास्तविक संभावना और उसका प्रभाव संबंधित जिले के आधिकारिक पूर्वानुमान से ही स्पष्ट होगा।
मौसम विभाग के अपडेट पर रहेगी नजर
राजस्थान में अक्टूबर के अंतिम दिनों में दिन का तापमान ऊंचा रहने और रात में ठंडक बढ़ने के बीच संभावित आंधी-बारिश मौसम में बदलाव का संकेत दे रही है। आने वाले दिनों में तापमान का रुख और बारिश का दायरा स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
राष्ट्रीय जनादेश की अपील: मौसम से जुड़ी चेतावनियों को गंभीरता से लें और अपने जिले का ताजा पूर्वानुमान भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आधिकारिक बुलेटिन से जरूर जांचें।
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केसी वेणुगोपाल का ऐलान— मोदी के सामने सरेंडर नहीं करेंगे; दिल्ली महारैली के लिए राजस्थान से एक लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य जयपुर से विशेष रिपोर्ट | 26 अक्टूबर 2026राष्ट्रीय जनादेश (RJN)कांग्रेस ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली में प्रस्तावित रैली को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सरेंडर नहीं करने की बात कही है। रैली को लेकर राजस्थान में भीड़ जुटाने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किए जाने की खबर है।
राजस्थान से एक लाख लोगों को दिल्ली ले जाने का लक्ष्य
रैली के लिए राजस्थान से एक लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रदेश में पार्टी संगठन के स्तर पर तैयारियां और कार्यकर्ताओं को जुटाने की कवायद की जा सकती है। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब तक कितनी तैयारियां पूरी हुई हैं, इसकी विस्तृत जानकारी की पुष्टि आवश्यक है।
केसी वेणुगोपाल के बयान के राजनीतिक मायने
वेणुगोपाल का बयान केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस के राजनीतिक रुख को दर्शाता है। दिल्ली में होने वाली रैली के जरिए पार्टी अपने मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश करेगी।
1 नवंबर को दिल्ली में रैली
रैली में राजस्थान सहित अन्य राज्यों से भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने की संभावना है। राजस्थान से एक लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य पूरा होता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में पार्टी की तैयारियों और जनभागीदारी से स्पष्ट होगा।
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सीएम भजनलाल का तोहफा, अजमेर डिस्कॉम के सभी जिलों में किसानों को अब दिन में मिलेगी बिजली: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दीपावली से पहले किसानों को बड़ी सौगात दी है। नागौर जिले के बिरलोका में 220 केवी ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस) सफलतापूर्वक प्रारंभ हो गया है। इससे अजमेर विद्युत वितरण निगम (डिस्कॉम) के सभी 14 जिलों में किसानों को दिन के समय दो ब्लॉक में बिजली आपूर्ति मिल सकेगी। इस व्यवस्था से क्षेत्र के किसानों को रात में सिंचाई कार्य से राहत मिलेगी तथा कृषि कार्य अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक हो सकेगा।
खींवसर सहित अन्य क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
उल्लेखनीय है कि अब तक अजमेर डिस्कॉम के 14 में से 13 जिलों में किसानों को दिन में दो ब्लॉक में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था लागू थी। बिरलोका जीएसएस के शुरू होने से शेष जिले में भी इस व्यवस्था का विस्तार होगा। इस परियोजना से बिरलोका, नारवा, हिसाबा, पांचला सिद्धा, खींवसर, पांचौड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। विशेष रूप से संपूर्ण खींवसर तहसील में किसानों को दिन के समय दो ब्लॉक में बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
विद्युत छीजत में कमी आएगी, आपूर्ति की गुणवत्ता में होगा सुधार
लगभग 170 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इस जीएसएस में 160 एमवीए क्षमता का 220/132 केवी पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित किया गया है। अत्याधुनिक स्काडा प्रणाली के उपयोग से पश्चिमी राजस्थान में उत्पादित सौर ऊर्जा का नागौर जिले में बेहतर उपयोग संभव होगा। इसके साथ ही विद्युत छीजत में कमी आएगी तथा वोल्टेज स्तर, बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार होगा।
अब तक प्रदेश के 27 जिलों में किसानों को मिल रही बिजली
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कृषक हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए वर्ष 2027 तक प्रदेश के किसानों को दिन में बिजली आपूर्ति की बजट घोषणा की और इस दिशा में प्रतिबद्धता से कार्य करते हुए अब तक प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध करवाई जा रही थी। पर अब राजस्थान सरकार के ऊर्जा विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 27 जिलों में किसानों को सिंचाई के लिए दिन के दो ब्लॉक में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। अजमेर डिस्कॉम के नागौर, अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, उदयपुर, सलूम्बर, प्रतापगढ़, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, झुन्झुनूं, सीकर एवं चित्तौड़गढ़, जयपुर डिस्कॉम के धौलपुर, बूंदी, कोटा, झालावाड़, जयपुर, डीग, भरतपुर, दौसा, करौली एवं टोंक तथा जोधपुर डिस्कॉम के जालौर, सिरोही एवं पाली जिलों में यह आपूर्ति मिल पा रही है।

जयपुर में 15 लाख की ठगी का खुलासा, बैंक का एजेंट ही निकला मास्टरमाइंड, ऐसे रचता था साजिशजयपुर। निवेश पर मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर 15 लाख रुपए से अधिक की साइबर ठगी के मामले में जयपुर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम हासिल करने के लिए इस्तेमाल किए गए फर्जी ऑनलाइन मर्चेंट खातों के पीछे बैंक का एक एजेंट था। आरोपी बुजुर्गों, मजदूरों, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और विद्यार्थियों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाता और फिर मोटे कमीशन के बदले देशभर में सक्रिय साइबर ठगों को बेच देता था। पुलिस ने इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
साइबर पुलिस थाना, जयपुर आयुक्तालय ने प्रकरण संख्या 124/2026 में तकनीकी अनुसंधान के आधार पर कार्रवाई करते हुए सीकर जिले के लोसल थाना क्षेत्र के खूड निवासी राजकुमार उर्फ राजू कासोटिया (35) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी एयरटेल पेमेंट बैंक का अधिकृत एजेंट है। उसने बैंक की ओर से उपलब्ध कराई गई खाता खोलने की सुविधा का कथित तौर पर दुरुपयोग किया।
छह ट्रांजेक्शन में 15.04 लाख रुपए की ठगी
पुलिस के मुताबिक, परिवादी ने शिकायत में बताया कि कथित एजिन्वेस्ट कंपनी के नाम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमोडिटी आदि में निवेश कर अधिक मुनाफा दिलाने का लालच देकर उससे संपर्क किया गया। इसके बाद छह अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 15 लाख 4 हजार 999 रुपए की ठगी की गई। मामले में साइबर पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच शुरू की गई।
पुलिस उपायुक्त (अपराध) अनुष्ठा कालिया के मार्गदर्शन में एसीपी साइबर क्राइम हेमराज और थानाधिकारी के निर्देशन में हेड कांस्टेबल संजय कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की गई। टीम ने तकनीकी साक्ष्य जुटाकर संदिग्धों की पहचान की और कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और खातों के इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है।
खाते खुलवाकर ठगों को बेच देता था
जांच के अनुसार, आरोपी खुद इन खातों का इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें दूसरे राज्यों में बैठे साइबर अपराधियों को बेचता था। इसके बाद ठगी से हासिल रकम इन खातों में ट्रांसफर की जाती थी। ऐसे खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। पुलिस मामले में वित्तीय लेन-देन और अन्य संभावित कड़ियों की जांच कर रही है।
पुलिस की आमजन से अपील
पुलिस ने लोगों से कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता खुलवाने या किसी दूसरे को इस्तेमाल के लिए देने से बचने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि आधार, पैन, एटीएम पिन और ओटीपी जैसी जानकारियां भी किसी से साझा नहीं करनी चाहिए। किसी तरह की साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।

राजस्थान: खाद आंदोलन के बाद नरेश मीणा पर FIR दर्ज, कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा पर लगाए आरोप: बारां जिले के छबड़ा में किसानों को खाद उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले नरेश मीणा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। छबड़ा थाने में उनके खिलाफ राजकीय कार्य में बाधा पहुंचाने, खाद वितरण के दौरान लोगों को उकसाने, रास्ता रोकने और अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह रिपोर्ट छबड़ा के सहायक कृषि अधिकारी सुरेश मालव की ओर से दर्ज करवाई गई है।
किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर नरेश मीणा ने आंदोलन किया था। इसी घटनाक्रम के बाद कृषि विभाग के अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। शिकायत में राजकीय कार्य में बाधा पहुंचाने, भीड़ को उकसाने और रास्ता रोकने सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं।
नरेश मीणा ने कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा पर लगाए आरोप
मुकदमा दर्ज होने के बाद नरेश मीणा ने कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि दबाव बनाकर उनके खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि पंचायत राज चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से उन्हें दोबारा जेल भेजने की कोशिश की जा सकती है।
नरेश मीणा ने कहा कि पंचायत राज चुनाव में जनता हाथी चुनाव चिह्न पर मतदान करेगी और बोर्ड बनाएगी। उनके इस बयान के बाद मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। हालांकि, कृषि मंत्री पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
बताया जा रहा है कि नरेश मीणा पंचायत राज चुनाव में जिले की विभिन्न सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने से बारां जिले की राजनीति में हलचल बढ़ने की संभावना है। हालांकि, उनकी गिरफ्तारी को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कृषि विभाग में भी हुआ प्रशासनिक बदलाव
इस घटनाक्रम से पहले कृषि विभाग में भी प्रशासनिक बदलाव किया गया था। जारी आदेश के अनुसार, जिला मुख्यालय पर कृषि विभाग (विस्तार) में संयुक्त निदेशक पद पर तैनात राजेश विजय को इस पद से हटाकर ‘आत्मा’ (कृषि विस्तार विभाग की विंग) में लगाया गया, जबकि सहायक निदेशक धनराज मीणा को संयुक्त निदेशक का कार्यभार सौंपा गया। फिलहाल, छबड़ा थाने में दर्ज मुकदमे के मामले में आगे की पुलिस कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। जांच के बाद ही आरोपों और मामले से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


सोशल मीडिया पर लग्जरी लाइफस्टाइल दिखाकर लोगों का भरोसा जीतना और फिर शादी का झांसा देकर निवेश के नाम पर पैसे ऐंठना-दिल्ली में सामने आए ठगी के एक मामले में पुलिस ने ऐसे ही आरोपों में विक्रांत कुमार उर्फ विक्की तोमर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी इंस्टाग्राम पर खुद को अमीर कारोबारी और क्रिकेट जगत से जुड़ी प्रभावशाली शख्सियत बताकर महिलाओं से संपर्क करता था। मामले में दिल्ली पुलिस की एक महिला कांस्टेबल से करीब 24 लाख रुपये की ठगी का आरोप है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने एक ही बैच की करीब 20 महिला कांस्टेबलों को निशाना बनाया हो सकता है। हालांकि, पुलिस जांच में पीड़ितों की सही संख्या और कुल ठगी की रकम की पुष्टि होना अभी बाकी है।
इंस्टाग्राम से शुरू हुई बातचीत, फिर निवेश का झांसा
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने करोल बाग थाने में तैनात महिला कांस्टेबल शिवानी से इंस्टाग्राम के जरिए संपर्क किया था। शुरुआत में उसने दिल्ली पुलिस में खेल कोटे के तहत भर्ती से जुड़ी जानकारी लेने की बात कही। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी और दोनों के बीच संपर्क व्हाट्सऐप तक पहुंच गया।
जांच के मुताबिक, आरोपी ने खुद को क्रिकेट जगत की जानी-मानी हस्ती और आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति के रूप में पेश किया। इसके बाद उसने महिला कांस्टेबल को निवेश पर अधिक मुनाफा दिलाने का भरोसा दिया। उसके दावों पर विश्वास करके महिला ने अपनी बचत की रकम लगाई। पुलिस के मुताबिक, उसने 12 लाख रुपये का व्यक्तिगत कर्ज भी लिया और परिचितों से पैसे उधार लेकर आरोपी के बताए अनुसार रकम ट्रांसफर की।
किराये की लग्जरी कारों से दिखाता था रईसी
पुलिस की जांच में आरोपी की कथित कार्यशैली का एक और पहलू सामने आया है। वह सोशल मीडिया पर महंगी गाड़ियों और आलीशान जीवनशैली से जुड़े वीडियो और रील्स पोस्ट करता था। रिपोर्टों के मुताबिक, वह लग्जरी कारें किराये पर लेकर महिलाओं को प्रभावित करता था और अपनी आर्थिक हैसियत का दिखावा करता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर एक ही किराये की कार का इस्तेमाल अलग-अलग महिलाओं को घुमाने के लिए करता था। इससे उसके पास महंगी गाड़ियां होने और संपन्न जीवन जीने का भ्रम पैदा होता था। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या उसने महिलाओं से अलग-अलग बहाने बनाकर कारों के किराये और अन्य खर्चों के लिए पैसे लिए थे।
आरोपी की लिव-इन पार्टनर भी दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू आरोपी की निजी जिंदगी से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उसकी लिव-इन पार्टनर भी दिल्ली पुलिस में महिला कांस्टेबल है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि आरोपी ने उसके संपर्कों के जरिए उसी बैच की दूसरी महिला कांस्टेबलों की जानकारी हासिल की और फिर उनसे संपर्क साधा।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने कितनी महिलाओं को इसी तरीके से निशाना बनाया और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने उसकी मदद की थी। इस मामले में किसी दूसरे व्यक्ति की भूमिका को लेकर जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
पहले से दर्ज हैं ठगी के पांच मामले
रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ दिल्ली के अलग-अलग थानों में ठगी के पांच मामले पहले से दर्ज हैं। इनमें मायापुरी, हरि नगर, इंद्रपुरी और पूर्वी जिला साइबर पुलिस से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी जून में जमानत पर जेल से बाहर आया था।
मौजूदा मामले में पुलिस उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंक खातों की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य कथित लेनदेन की पूरी कड़ी का पता लगाना, अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करना और यह जानना है कि ठगी की रकम कहां इस्तेमाल हुई।
महिला कांस्टेबल ने लगाए छेड़छाड़ के आरोप
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोपी पर मुलाकात के दौरान अनुचित तरीके से छूने का आरोप भी लगाया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। आरोपों की जांच जारी है और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
सोशल मीडिया पर दोस्ती करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
यह मामला सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली संपन्न जीवनशैली और ऑनलाइन निवेश के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के जोखिम को सामने लाता है। किसी व्यक्ति के महंगी गाड़ियों के वीडियो, बड़े-बड़े दावे या प्रभावशाली लोगों से संपर्क दिखाने भर से उसकी आर्थिक स्थिति और विश्वसनीयता साबित नहीं होती।
ऑनलाइन दोस्ती या शादी के वादे के बाद यदि कोई व्यक्ति निवेश पर असामान्य रूप से ज्यादा मुनाफे का भरोसा देकर पैसे मांगता है, तो सावधानी बरतनी चाहिए। निवेश करने से पहले संबंधित कंपनी, प्लेटफॉर्म और भुगतान पाने वाले खाते की स्वतंत्र रूप से जांच करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कर्ज लेकर निवेश करने से बचें और बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या अन्य गोपनीय विवरण साझा न करें।
यदि ऑनलाइन ठगी हो जाए, तो तुरंत बैंक को सूचना दें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती शिकायत से लेनदेन पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
BJP के वरिष्ठ नेता ने दिया इस्तीफा, 50 साल तक पार्टी में रहे; ‘गद्दार-बेवड़ा’ कहकर अपमानित करने का आरोपRajasthan Rajsamand BJP Leader Resigns: देवगढ़ (राजसमंद): जनसंघ के दौर से भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़े रहे वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रधान एवं लसानी ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान चिरंजीलाल टांक ने पांच दशक के राजनीतिक जुड़ाव के बाद पार्टी की सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र बीजेपी के राजसमंद जिला अध्यक्ष जगदीशचंद्र पालीवाल को भेजा है। अपने इस्तीफे में टांक ने संगठन और सत्ता स्तर पर पिछले 10-12 वर्षों से लगातार अनदेखी और उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की है।
चिरंजीलाल टांक के अनुसार, वे पिछले 50 वर्षों से भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे। उन्होंने साल 1995 से 2000 तक लसानी सरपंच, 2000 से 2003 तक बीजेपी के संयुक्त देवगढ़ मंडल अध्यक्ष तथा 2005 से 2010 तक देवगढ़ पंचायत समिति प्रधान के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में पार्टी की जड़ें मजबूत करने के लिए काम किया।
वायरल वीडियो बना इस्तीफे की वजह
चिरंजीलाल टांक ने आरोप लगाया कि स्थानीय नेतृत्व और पार्टी के कुछ नए कार्यकर्ताओं की ओर से बार-बार उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई। उनके अनुसार, 5-7 दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में उनके लिए ‘गद्दार’ और ‘बेवड़ा’ जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया तथा पार्टी से बाहर करने या इस्तीफा देने जैसी बातें कही गईं। टांक ने इसे सार्वजनिक अपमान बताते हुए 24 अक्टूबर को भारी मन से सक्रिय सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया।
दिग्गज नेताओं के साथ किया राजनीतिक सफर
अपने त्यागपत्र में टांक ने पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, स्वर्गीय हरिओम सिंह राठौड़, स्वर्गीय किरण माहेश्वरी तथा वरिष्ठ नेताओं नंदलाल सिंघवी, बंसीलाल खटीक और मांधाता सिंह के सानिध्य एवं मार्गदर्शन को याद किया। इस्तीफे की प्रतिलिपि प्रदेश भाजपा कार्यालय, जयपुर भी भेजी गई है। पांच दशक पुराने कार्यकर्ता के इस्तीफे से देवगढ़-भीम क्षेत्र में भाजपा संगठन और स्थानीय राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब इस घटनाक्रम पर स्थानीय संगठन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।
चिरंजीलाल टांक पार्टी के निष्ठावान और वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं। उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। उनसे पार्टी से जुड़े रहने और संगठन का काम करने का आग्रह भी किया गया है।
-जगदीश पालीवाल, बीजेपी जिलाध्यक्ष, राजसमंद

राजस्थान में विदेशों से निवेश जुटाने का बड़ा प्लान, भजनलाल सरकार ने सीनियर IAS अफसरों को दी जिम्मेदारी, देखें पूरी लिस्टराजस्थान सरकार ने प्रदेश में निवेश, व्यापार और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अपने कई IAS अधिकारियों को बेहद अहम जिम्मेदारी सौंपी है। जानें किस आइएएस को किस प्रदेश और किस देश की जिम्मेदारी मिली।
जयपुर। राजस्थान सरकार ने प्रदेश में निवेश, व्यापार और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 21 IAS अधिकारियों को अहम जिम्मेदारी सौंपी है। कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, ये अधिकारी अलग-अलग राज्यों और विदेशों में राजस्थान के लिए निवेश और व्यापार के अवसर तलाशेंगे। साथ ही संबंधित देशों में रहने वाले प्रवासी राजस्थानियों (NRRs) और अन्य राज्यों में पदस्थ राजस्थान के अधिकारियों के साथ समन्वय करेंगे।
सरकार ने इस संबंध में पहले जारी आदेशों को अधिक्रमित करते हुए नई जिम्मेदारी तय की है। अधिकारियों को घरेलू एवं प्रवासी राजस्थानी मामलों के विभाग (DORA) के निर्देशों के अनुसार काम करना होगा।
किस अधिकारी को किस राज्य और देश की जिम्मेदारी?
राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अधिकारियों को अलग-अलग राज्यों और देशों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है।
1- गायत्री ए. राठौड़ – गोवा और सिंगापुर
2- टी. रविकांत – आंध्र प्रदेश और केन्या
3- मंजू राजपाल – बिहार और हांगकांग
4- नवीन जैन – हरियाणा और सऊदी अरब
5- कृष्ण कुणाल – झारखंड और कतर
6- रवि जैन – छत्तीसगढ़ और ऑस्ट्रेलिया
7- डॉ. रवि कुमार सुरपुर – कर्नाटक और दक्षिण अफ्रीका
8- डॉ. जोगा राम – केरल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
9- पी. रमेश – तेलंगाना और आयरलैंड
10- आरती डोगरा – उत्तराखंड और जर्मनी
11- डॉ. रोहित गुप्ता – उत्तर प्रदेश और ब्रिटेन (UK)
12- आनंदि – तमिलनाडु और जापान
13- रंजन विशाल – पंजाब और स्पेन
14- अर्चना सिंह – मध्यप्रदेश और फिनलैंड-डेनमार्क
15- नकाते शिवप्रसाद मदन – महाराष्ट्र और ब्राजील
16- शिवांगी स्वर्णकार – असम और अमेरिका (USA)
17- अनुपमा जोरवाल – दिल्ली और इटली
18- रुक्मणि रियार – पश्चिम बंगाल और स्वीडन-नॉर्वे
19- हिमांशु गुप्ता – ओडिशा और युगांडा
20- अरविंद कुमार पोसवाल – हिमाचल प्रदेश और नेपाल
21- सुरेश कुमार ओला – गुजरात और स्विट्जरलैंड
निवेश बढ़ाने और प्रवासी राजस्थानियों से जुड़ने पर जोर
भजनलाल सरकार की इस पहल का उद्देश्य राजस्थान में निवेश की संभावनाओं को तलाशना, कारोबार को प्रोत्साहित करना और प्रदेश के विकास के लिए देश-विदेश में संपर्क मजबूत करना है। निर्धारित अधिकारी अपने आवंटित राज्यों और देशों में संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर निवेशकों को राजस्थान में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करेंगे।


: दीपावली से पहले खरीदारी और नए निवेश की योजना बना रहे लोगों के लिए रविवार 1 नवंबर का दिन बेहद खास रहने वाला है। अगर आप नया वाहन, मकान, सोना-चांदी या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स खरीदने की सोच रहे हैं, तो 1 नवंबर को आने वाला रवि पुष्य नक्षत्र आपके लिए उत्तम अवसर लेकर आ रहा है। 27 नक्षत्रों के राजा पुष्य और सूर्य देव की सप्तमी तिथि के मेल से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो व्यापारिक बहीखातों से लेकर प्रॉपर्टी रजिस्ट्री तक हर निवेश को चिर-स्थायी लाभ देने वाला माना गया है।सूर्य, शनि और गुरु के शुभ प्रभाव के चलते यह दिन भूमि, भवन, वाहन और बहीखातों की खरीदारी से लेकर दीर्घकालिक निवेश के लिए अत्यंत फलदायी साबित होगा।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी 1 नवंबर को है, इस दिन पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। रविवार को पड़ने के कारण यह ‘रवि पुष्य नक्षत्र कहलाएगा। रविवार के दिन आने वाला पुष्य नक्षत्र सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण करता है। सप्तमी तिथि के अधिपति भी भगवान सूर्य हैं, इसलिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन किए गए धार्मिक, आध्यात्मिक अनुष्ठान और पारिवारिक व व्यावहारिक कार्य विशेष अनुकूलता प्रदान करेंगे।
चिर-समृद्धि प्रदान करते हैं कार्य
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार, नक्षत्र मेखला की गणना में 27 नक्षत्रों के बीच पुष्य नक्षत्र को राजा का पद प्राप्त है। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि और उपस्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। इन दोनों ग्रहों के प्रभाव से इस नक्षत्र को विशेष ऊर्जा मिलती है। मान्यता है, इस नक्षत्र की साक्षी में शुरू किए गए कार्य चिर-समृद्धि प्रदान करते हैं। कार्तिक मास में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। विशेष बात यह भी है कि शनि वर्तमान में देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में गोचर कर रहे हैं, जिससे यह संयोग और भी दुर्लभ बन गया है।
खरीदारी का महामुहूर्त
भारतीय परंपरा में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष के 15 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दीपावली से ठीक पहले आने वाला यह रवि पुष्य नक्षत्र बेहद मंगलकारी माना गया है। इस दिन पारंपरिक व्यापारी नए बही-खाते और दवात-कलम की खरीदारी कर पूजन की तैयारी करते हैं। श्रद्धालु सोने, चांदी व तांबे के सिक्के, विभिन्न यंत्र, धातु व पाषाण की देव प्रतिमाएं खरीदते हैं। साथ ही गृह-उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी के लिए भी यह दिन श्रेष्ठ है।
मकान की रजिस्ट्री और पॉलिसी के लिए उत्तम
पुष्य नक्षत्र के अधिपति शनि देव होने के कारण अचल संपत्ति (मकान, भूमि) की रजिस्ट्री और दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) पॉलिसियों में निवेश का विशेष लाभ मिलता है, क्योंकि ये दोनों क्षेत्र शनि के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी वित्तीय निवेश से पहले नियम व शर्तों की विधिवत समीक्षा अवश्य कर लेनी चाहिए।
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और वाहनों की खरीद अनुकूल
इस दिन बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, दोपहिया व चारपहिया वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन, भूखंड, खेत और फ्लैट आदि की जमकर खरीदारी होती है। आमजन श्रेष्ठ मुहूर्त की प्रतीक्षा करते हैं ताकि वे अपने परिवार की उन्नति के लिए शुभ संकल्पों को पूरा कर सकें। इस दृष्टि से रवि पुष्य सपनों को साकार करने का उत्तम अवसर लेकर आ रहा है।
देवली (टोंक), राजस्थान | 23 अक्टूबर 2026राजस्थान के टोंक जिले के देवली में केनरा बैंक के एक कर्मचारी की बैंक परिसर के अंदर मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान धनराज मीणा (36) के रूप में हुई है, जो बैंक में ग्रेड-फोर्थ कर्मचारी थे। घटना शुक्रवार सुबह की बताई जा रही है।
बैंक का गेट अंदर से था बंद
बैंक मैनेजर एन.के. मीणा के अनुसार, सुबह करीब 9:30 बजे अन्य कर्मचारी बैंक पहुंचे तो मुख्य गेट अंदर से बंद मिला। काफी देर तक आवाज देने और गेट खटखटाने के बावजूद दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद दूसरी चाबी से गेट खोलकर कर्मचारी अंदर पहुंचे, जहां धनराज मीणा फंदे से लटके मिले।
सीसीटीवी फुटेज आया सामने, शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे की घटना; मृतक की पहचान धनराज मीणा (36) के रूप में हुई
देवली (टोंक), 23 अक्टूबर। राजस्थान के टोंक जिले के देवली में केनरा बैंक के अंदर एक कर्मचारी की मौत का मामला सामने आया है। बैंक में ग्रेड-फोर्थ कर्मचारी के पद पर कार्यरत धनराज मीणा (36) का शव शुक्रवार सुबह बैंक के अंदर फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे की बताई जा रही है। कर्मचारी बैंक के अंदर पंखे से फंदा लगाकर लटका मिला। घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आने की जानकारी दी गई है।
बैंक प्रबंधन ने दी घटना की जानकारी
बैंक मैनेजर एन.के. मीणा ने घटना के संबंध में जानकारी दी। फिलहाल इस मामले में कर्मचारी की मौत के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है। पुलिस जांच के बाद ही घटना की परिस्थितियों और अन्य तथ्यों का पता चल सकेगा।
मौत की वजह जांच का विषय
घटना के कारणों को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। पुलिस की जांच, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और अन्य जानकारियों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।
राष्ट्रीय जनादेश | राजस्थान



पैरा एशियन गेम्स में भारत का दमदार प्रदर्शन: हनी ने जेवलिन थ्रो में बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, भारत को मिला दिन का 5वां गोल्डबैडमिंटन में नीतेश और आर्चरी में हरविंदर-विजय ने भी जीता स्वर्ण पदक; भारतीय खिलाड़ियों की शानदार उपलब्धियों से देश का बढ़ा गौरव
नई दिल्ली। पैरा एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया है। प्रतियोगिता में भारत को दिन का पांचवां स्वर्ण पदक मिला। हनी ने जेवलिन थ्रो में विश्व रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं, बैडमिंटन में नीतेश तथा आर्चरी में हरविंदर और विजय की जोड़ी ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीते।
हनी ने जेवलिन थ्रो में रचा इतिहास
भारतीय खिलाड़ी हनी ने जेवलिन थ्रो स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए विश्व रिकॉर्ड बनाया। उनके इस प्रदर्शन ने भारत की पदक तालिका में एक और स्वर्ण पदक जोड़ दिया। हनी की उपलब्धि पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की बढ़ती क्षमता और मेहनत को दर्शाती है।
बैडमिंटन में नीतेश ने जीता गोल्ड
बैडमिंटन स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ी नीतेश ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने मुकाबले में दमदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। उनकी जीत से भारतीय दल के उत्साह में बढ़ोतरी हुई।
आर्चरी में हरविंदर-विजय की जोड़ी चमकी
आर्चरी स्पर्धा में हरविंदर और विजय ने शानदार तालमेल के साथ मुकाबला खेलते हुए स्वर्ण पदक जीता। दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने भारत की पदक उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण सफलता जोड़ी।
पैरा खिलाड़ियों ने बढ़ाया देश का सम्मान
इन सफलताओं के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। जेवलिन थ्रो, बैडमिंटन और आर्चरी में मिली उपलब्धियां भारतीय पैरा खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और संघर्ष को उजागर करती हैं।
पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की ऐसी उपलब्धियां देश के युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों ने एक बार फिर साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर अभ्यास से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
राष्ट्रीय जनादेश | खेल समाचार
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राष्ट्रीय जनादेश | साइबर अलर्ट दिनांक: 23 अक्टूबर 2026क्या राजस्थान सरकार का डेटा हुआ लीक?86 लाख ई-मेल और 59 हजार मोबाइल नंबर तक पहुंच का दावा, पासवर्ड बदलने के निर्देशों की चर्चा
जयपुर। राजस्थान के सरकारी विभागों के डेटा की साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। साइबर सुरक्षा निगरानी से जुड़ी एक रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग से संबंधित बताए जा रहे डेटा के लीक होने का दावा किया गया है। इस कथित डेटा में लाखों ई-मेल और हजारों मोबाइल नंबर शामिल होने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित रूप से उजागर हुए डेटा में लगभग 86.3 लाख ई-मेल, 59,460 मोबाइल नंबर और अन्य संवेदनशील रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। साइबर सुरक्षा निगरानी खाते FalconFeeds.io की ओर से इस मामले को लेकर जानकारी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर डेटा की प्रामाणिकता, सेंधमारी के वास्तविक स्रोत और नुकसान की पूरी सीमा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पासवर्ड बदलने के निर्देशों की चर्चा
मामले में पासवर्ड बदलने के आदेशों को लेकर भी चर्चा है। यदि सरकारी ई-मेल खातों या लॉगिन विवरणों तक अनधिकृत पहुंच की पुष्टि होती है, तो इससे सरकारी पत्राचार और विभागीय सूचनाओं की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। हालांकि, पासवर्ड बदलने के निर्देश किस विभाग ने जारी किए और वे किन खातों पर लागू हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
नागरिकों और कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?
- सरकारी या निजी ई-मेल का पासवर्ड मजबूत और अलग रखें।
- जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें।
- संदिग्ध लिंक, अटैचमेंट और पासवर्ड मांगने वाले संदेशों से सावधान रहें।
- किसी अनजान व्यक्ति को OTP या लॉगिन विवरण न दें।
- सरकारी कर्मचारी अपने विभाग के आईटी या साइबर सुरक्षा प्रकोष्ठ के आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या वास्तव में सरकारी सिस्टम में सेंधमारी हुई है, कौन-सा डेटा प्रभावित हुआ है और क्या किसी खाते का दुरुपयोग किया गया है। संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और तकनीकी जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
राष्ट्रीय जनादेश की अपील: साइबर सुरक्षा से जुड़ी अपुष्ट सूचनाएं साझा करने से बचें और केवल आधिकारिक निर्देशों के आधार पर जरूरी कदम उठाएं।
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जयपुर में विकास को मिलेगी नई रफ्तार: ₹47.87 करोड़ से बनेगा गोपालपुरा अंडरपास, सिविल लाइंस ROB के नीचे बनेगा स्पोर्ट्स एरिनाजयपुर | राष्ट्रीय जनादेश
राजस्थान की राजधानी जयपुर में शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नागरिक सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योजनाएं सामने आई हैं। गोपालपुरा अंडरपास के निर्माण के लिए 47.87 करोड़ रुपये की लागत का प्रस्ताव चर्चा में है। वहीं, सिविल लाइंस रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के नीचे स्पोर्ट्स एरिना विकसित करने की योजना भी सामने आई है। इन प्रस्तावों को जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की PWC बैठक में लिए गए फैसलों से जोड़कर बताया गया है।
इन परियोजनाओं से शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने, उपलब्ध शहरी स्थान का उपयोग बढ़ाने और खेल गतिविधियों के लिए सुविधाएं विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ने की उम्मीद है।
गोपालपुरा अंडरपास से यातायात को मिल सकती है राहत
गोपालपुरा क्षेत्र जयपुर के प्रमुख शहरी इलाकों में शामिल है। शहर की आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ ही प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में अंडरपास जैसी आधारभूत परियोजनाएं सड़क यातायात को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
गोपालपुरा अंडरपास परियोजना के लिए 47.87 करोड़ रुपये की लागत का आंकड़ा सामने आया है। परियोजना का उद्देश्य और इसके तकनीकी विवरण आधिकारिक रूप से स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि इससे किन मार्गों पर यातायात का दबाव कम होगा और वाहन चालकों को कितनी राहत मिलेगी।
अंडरपास के निर्माण से संबंधित कार्ययोजना, निर्माण शुरू होने की तारीख और पूरा होने की समयसीमा की जानकारी भी आगे महत्वपूर्ण रहेगी। परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद इसका वास्तविक लाभ निर्माण की गुणवत्ता, सड़क संपर्क और यातायात प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
सिविल लाइंस ROB के नीचे विकसित होगा स्पोर्ट्स एरिना
जयपुर में शहरी सुविधाओं के विस्तार के साथ खेल गतिविधियों के लिए स्थान विकसित करने की योजना भी चर्चा में है। सिविल लाइंस रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के नीचे स्पोर्ट्स एरिना बनाने की योजना का उद्देश्य उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग करना हो सकता है।
शहरों में पुलों और ओवरब्रिज के नीचे की जगह का उचित नियोजन करके खेल, फिटनेस और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों के लिए सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। हालांकि, सिविल लाइंस ROB के नीचे प्रस्तावित स्पोर्ट्स एरिना में कौन-कौन से खेल उपलब्ध होंगे, इसका क्षेत्रफल कितना होगा और आम नागरिकों को इसका लाभ किस प्रकार मिलेगा, इन विवरणों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
यदि योजना को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे युवाओं और खेल प्रेमियों को अभ्यास के लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
JDA की PWC बैठक के फैसलों पर नजर
जयपुर विकास प्राधिकरण शहर के नियोजित विकास, सड़क परियोजनाओं और नागरिक सुविधाओं से संबंधित योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। PWC बैठक में सामने आए इन प्रस्तावों को लेकर अब परियोजनाओं की स्वीकृति, बजट संबंधी औपचारिकताओं और क्रियान्वयन की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
गोपालपुरा अंडरपास और सिविल लाइंस ROB के नीचे स्पोर्ट्स एरिना से संबंधित योजनाओं की प्रगति पर शहरवासियों की नजर रहेगी। किसी भी परियोजना का वास्तविक लाभ तभी सामने आता है, जब उसकी योजना के साथ निर्माण कार्य, समयबद्ध क्रियान्वयन और रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित हो।
शहरवासियों को क्या मिल सकती है राहत?
इन योजनाओं से जयपुर में दो महत्वपूर्ण जरूरतों पर ध्यान केंद्रित होने की संभावना है। पहली, बढ़ते यातायात दबाव के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाना और दूसरी, शहरी क्षेत्र में खेल एवं सार्वजनिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं तैयार करना।
गोपालपुरा अंडरपास की लागत 47.87 करोड़ रुपये बताई जा रही है। वहीं, सिविल लाइंस ROB के नीचे स्पोर्ट्स एरिना विकसित करने की योजना शहर में उपलब्ध स्थान के उपयोग से जुड़ी है। दोनों परियोजनाओं के विस्तृत तकनीकी विवरण और कार्ययोजना सामने आने के बाद इनके संभावित लाभों की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
राष्ट्रीय जनादेश की नजर: जयपुर में इन परियोजनाओं की आधिकारिक स्वीकृति, निर्माण शुरू होने की तारीख, समयसीमा और स्पोर्ट्स एरिना की सुविधाओं से जुड़ी आगे की जानकारी पर नजर रहेगी।
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: शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2026) का पर्व इस वर्ष 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होकर अमृतमयी चांदनी बरसाता है। इस बार रवि, हर्षण और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग पर्व को विशेष बना रहा है। मान्यता है कि चांदनी में रखी रखीर का अगले दिन सेवन करने से स्वास्थ्य लाभ होता है।
25 को पर्व, 26 को स्नान-दान
ज्योतिषाचार्य जनार्दन शुक्ला के अनुसार पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार स्नान-दान 26 अक्टूबर को होगा, जबकि शरद पूर्णिमा का मुख्य पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
रात 9 बजे के बाद रखें खीर (Sharad Purnima Kheer Timing)
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, खीर को रात 9 बजे के बाद खुले आसमान में चंद्रमा की सीधी रोशनी में रखें और अगली सुबह सेवन करें। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या, तुला और मीन राशि वालों के लिए यह संयोग विशेष शुभ है। अन्य राशियों के जातक भी मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा कर सकते हैं। धन, सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए राशि के अनुसार पूजा, मंत्र जाप और दान का विधान बताया गया
ये रहेंगे शुभ योग और मुहूर्त
रवि योग सुबह 6:28 से शाम 7:22 बजे तक रहेगा। इसके बाद सर्वार्थ सिद्धि योग 26 अक्टूबर की सुबह 6:29 बजे तक रहेगा। चंद्रोदय शाम 5 बजे होगा। हर्षण योग शाम 5:22 बजे तक रहेगा, फिर वज्र योग शुरू होगा। रेवती नक्षत्र शाम 7:22 बजे तक और इसके बाद अश्विनी नक्षत्र रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:46 से 5:37, अभिजीत मुहूर्त 11:42 से दोपहर 12:27, अमृत काल शाम 5:05 से 6:36 और निशिता मुहूर्त रात 11:40 से 12:31 बजे तक रहेगा।
पूर्णिमा की रात को चंद्रमा पृथ्वी के अत्यधिक निकट होता है
ज्योतिषाचार्य रवीशराय गौड़ के अनुसार शरद पूर्णिमा पर खीर खाने को फलदायी माना जाता है। इसके पीछे वैज्ञानिक और पौराणिक दोनों मान्यताएं हैं। ऋर्षियों का चिंतन है और पूराणों में उल्लेख है कि पूर्णिमा की मध्यरात्रि में चंद्रमा सोलह कलाओं से युक्त अमृत वर्षा होने पर ओस के कण के रूप में अमृत की बूंदें गिरती हैं। इसलिए रात को चांदी के पात्र में खीर को रखा जाता है। ताकि अमृत के कण खीर के पात्र में गिरे और यह अमृत तुल्य हो जाती है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के अत्यधिक निकट आ जाता है और इस ऋतु में मौसम साफ रहता है।
शरीर पर चंद्रमा की किरणे पड़ना माना जाता है शुभ
शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र किरणों का शरीर पर पड़ना शुभ माना जाता है। इसका वैज्ञानिक तथ्य भी है। खीर दूध और चावल से बनकर तैयार होती है। दरअसल दूध में लैक्टिक नाम का एक अम्ल होता है। यह एक ऐसा तत्व होता है जो चंद्रमा की किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। वहीं चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया आसान हो जाती है। इसी के चलते सदियों से ऋषि.मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है।
दौसा में सामूहिक दुष्कर्म : अशोक गहलोत बोले- ‘प्रदेश में बेटियां सुरक्षित नहीं, सरकार कुंभकर्णी नींद में सो रही’दौसा। राजस्थान के दौसा जिले में 16 वर्षीय नाबालिग के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। घटना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रदेश में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और भाजपा सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय कुंभकर्णी नींद में सो रही है। वहीं, पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। दौसा एसपी कुंदन कांवरिया के अनुसार, कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, घटना बुधवार रात दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पास की है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में दो युवकों पर अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि दोनों युवक उसे जबरन अपने साथ ले गए और सुनसान स्थान पर वारदात को अंजाम दिया। इसी दौरान नाबालिग को अचानक प्रसव पीड़ा हुई और उसने बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद आरोपी उसे और नवजात को वहीं छोड़कर फरार हो गए। पीड़िता किसी तरह नवजात को कपड़े में लपेटकर अस्पताल पहुंची। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद नवजात को मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया और उसके बयान दर्ज किए। शिकायत के आधार पर अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
अशोक गहलोत ने सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर घटना को इंसानियत को शर्मसार करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर परिजनों के मन में डर है। गहलोत ने आरोप लगाया कि महिला सुरक्षा पर बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही है।
डोटासरा बोले- घर से लेकर बाहर तक बेटियां असुरक्षित
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने इसे राजस्थान को शर्मसार करने वाली घटना बताते हुए कहा कि घर से लेकर बाहर तक बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि कानून-व्यवस्था में सुधार कब होगा और बच्चियों को सुरक्षित माहौल कब मिलेगा।
इन्होंने कहा-
‘पर्चा बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। कुछ आरोपियों को डिटेन भी किया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।’ –कुंदन कांवरिया, एसपी दौसा


RJN BREAKING NEWS | जयपुरगांधीनगर स्टेशन के बाहर कार सवारों का उत्पातविवाद के बाद तेज रफ्तार स्विफ्ट से कई गाड़ियों को मारी टक्कर, लोगों को कुचलने की कोशिश का आरोपजयपुर। राजधानी जयपुर में गांधीनगर रेलवे स्टेशन के बाहर कार सवार बदमाशों द्वारा उत्पात मचाने का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसी विवाद के बाद स्विफ्ट कार में सवार लोगों ने तेज रफ्तार से गाड़ी दौड़ाते हुए दूसरी गाड़ियों को टक्कर मार दी। इस दौरान कार से लोगों को कुचलने की कोशिश किए जाने का आरोप भी सामने आया है।
विवाद के बाद सड़क पर मची अफरा-तफरी
बताया जा रहा है कि गांधीनगर स्टेशन के बाहर विवाद होने के बाद कार सवारों ने तेज रफ्तार में स्विफ्ट दौड़ाई। इस दौरान रास्ते में आने वाले वाहनों को टक्कर मारे जाने की बात सामने आई है। घटना से मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
लोगों की सुरक्षा पर उठे सवाल
सार्वजनिक स्थान पर इस तरह तेज रफ्तार से वाहन चलाने और लोगों को टक्कर मारने की कोशिश के आरोपों ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मामले में पुलिस की कार्रवाई, आरोपियों की पहचान और घटना में किसी के घायल होने की जानकारी की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
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डीएपी खाद के लिए लाठी लेकर सड़क पर उतरे नरेश मीणा, पेड़ पर चढ़कर की नारेबाजीएसडीएम कार्यालय के बाहर धरना, खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों में नाराजगी; समय पर डीएपी नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
राजस्थान | राष्ट्रीय जनादेश ब्यूरो
राजस्थान में डीएपी खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों की परेशानी एक बार फिर चर्चा में है। खाद की मांग को लेकर नरेश मीणा लाठी लेकर सड़क पर उतर आए। विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने पेड़ पर चढ़कर नारेबाजी की। वहीं, लोगों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना देकर अपनी मांगों को उठाया। इस घटनाक्रम ने किसानों को खाद उपलब्ध कराने से जुड़े मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
खाद की मांग को लेकर सड़क पर प्रदर्शन
डीएपी खाद रबी सहित विभिन्न फसलों की बुवाई के समय किसानों के लिए महत्वपूर्ण उर्वरक है। ऐसे में इसकी उपलब्धता प्रभावित होने पर किसानों को खेती की तैयारी में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। खाद की मांग को लेकर हुए इस प्रदर्शन में नरेश मीणा के सड़क पर उतरने और पेड़ पर चढ़कर नारेबाजी करने की बात सामने आई है।
प्रदर्शन के दौरान लाठी लेकर सड़क पर उतरने का घटनाक्रम भी चर्चा का विषय बना। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की हिंसा, सड़क जाम या अन्य अप्रिय घटना हुई या नहीं।

एसडीएम कार्यालय के बाहर दिया धरना
डीएपी खाद की मांग को लेकर लोगों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना दिया। धरने के माध्यम से खाद की उपलब्धता से जुड़ी समस्या को प्रशासन के सामने उठाया गया। किसानों के लिए समय पर खाद मिलना जरूरी है, क्योंकि बुवाई के दौरान देरी होने पर कृषि कार्यों की पूरी समय-सारणी प्रभावित हो सकती है।
ऐसे मामलों में किसानों की प्रमुख अपेक्षा रहती है कि खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित हो, वितरण व्यवस्था पारदर्शी रहे और जरूरत के समय उन्हें उर्वरक के लिए भटकना नहीं पड़े। हालांकि, इस मामले में प्रदर्शनकारियों की ओर से रखी गई विस्तृत मांगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
डीएपी की उपलब्धता क्यों है अहम?
डीएपी यानी डाय-अमोनियम फॉस्फेट फसल की शुरुआती बढ़वार के लिए आवश्यक फॉस्फोरस और नाइट्रोजन उपलब्ध कराने वाला उर्वरक है। बुवाई के समय इसकी मांग बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है। किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने की स्थिति में परेशानी बढ़ सकती है।
ऐसे में प्रशासन और संबंधित कृषि विभाग के सामने खाद की उपलब्धता, उचित वितरण तथा किसानों तक समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी रहती है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर
नरेश मीणा के प्रदर्शन और एसडीएम कार्यालय के बाहर धरने के बाद अब मामले में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी। खाद की वास्तविक उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और किसानों की मांगों पर प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
राष्ट्रीय जनादेश की नजर: डीएपी खाद की मांग को लेकर हुए इस प्रदर्शन ने किसानों की खाद संबंधी समस्याओं को सामने रखा है। मामले के सटीक स्थान, प्रदर्शन की तारीख, किसानों की विस्तृत मांगों और प्रशासन के जवाब की पुष्टि के बाद खबर को और विस्तार दिया जा सकता है।
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राजस्थान में कई गांवों में मतदान का बहिष्कार!पाली, जोधपुर और कोटा में ग्रामीणों ने वोट डालने से किया इनकार
कहीं ग्रामीणों की नाराजगी, तो कहीं OBC आरक्षण बना मतदान से दूरी की वजह
पाली/जोधपुर/कोटा। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण के मतदान के दौरान कई गांवों में ग्रामीणों द्वारा मतदान के बहिष्कार के मामले सामने आए हैं। पाली, जोधपुर और कोटा जिलों में अलग-अलग कारणों से ग्रामीणों ने वोट डालने से इनकार कर दिया।
📍 पाली: डूठारिया और नेपावास में बहिष्कार
पाली जिले की रानी पंचायत समिति के डूठारिया गांव और सोजत क्षेत्र के नेपावास गांव में ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया। इन गांवों में मतदान से दूरी बनाए जाने की सूचना सामने आई है।
📍 जोधपुर: OBC आरक्षण को लेकर नाराजगी
जोधपुर जिले की ग्राम पंचायत मंगल सिंह नगर में OBC आरक्षण के मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने वोट नहीं डालने का फैसला किया। आरक्षण से जुड़ा मुद्दा यहां मतदान बहिष्कार की वजह बताया गया है।
📍 कोटा: इटावा क्षेत्र में भी मतदान का बहिष्कार
कोटा जिले के इटावा क्षेत्र की सीनोता ग्राम पंचायत के अंतर्गत चकटोडी और टोडीखेड़ली गांवों में भी ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया।
🗳️ मतदान पर पड़ा असर
पहले चरण के मतदान के दौरान इन गांवों में बहिष्कार की खबरों ने स्थानीय चुनावी माहौल को प्रभावित किया है। ग्रामीणों की मांगों, प्रशासन की प्रतिक्रिया और मतदान प्रतिशत पर इसके वास्तविक असर की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
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लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने से कमर, पीठ और कंधों में अकड़न महसूस होना आम समस्या है। ऐसे में हस्तोत्तानासन शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव लाने और लचीलापन बढ़ाने में मददगार हो सकता है। आयुष मंत्रालय की योग संबंधी सामग्री में भी इस आसन के लाभ बताए गए हैं। हालांकि, इसे करते समय सही तकनीक और जरूरी सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए।
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026। आजकल ऑफिस में लगातार कंप्यूटर पर काम करना, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल और शारीरिक गतिविधियों की कमी लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गई है। इसका असर कमर, गर्दन और पीठ पर दिखाई देने लगता है। घंटों एक ही स्थिति में बैठे रहने से मांसपेशियों में जकड़न और थकान महसूस हो सकती है।
ऐसी स्थिति में नियमित योगाभ्यास शरीर को सक्रिय रखने का अच्छा विकल्प हो सकता है। योग के विभिन्न आसनों में हस्तोत्तानासन एक सरल मुद्रा है, जिसमें हाथों को सिर के ऊपर उठाकर शरीर को खींचा जाता है। यह अभ्यास पीठ और कंधों की मांसपेशियों को सक्रिय करने तथा रीढ़ की गतिशीलता बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी लंबे समय तक निष्क्रिय बैठे रहने के बजाय नियमित शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देता है।
क्या है हस्तोत्तानासन?
हस्तोत्तानासन संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है। इसमें ‘हस्त’ का अर्थ हाथ और ‘उत्तान’ का अर्थ ऊपर की ओर खिंचाव है। इस आसन में दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाकर शरीर को लंबा खींचा जाता है।
सूर्य नमस्कार की प्रचलित श्रृंखला में हस्त उत्तानासन को दूसरे और ग्यारहवें चरण के रूप में किया जाता है। इसमें हाथ ऊपर उठाकर शरीर को हल्का पीछे झुकाया जाता है।
आयुष मंत्रालय के मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान की सामग्री में ऊर्ध्व हस्तोत्तानासन का एक पार्श्व झुकाव वाला रूप भी बताया गया है, जिसमें हाथ ऊपर उठाकर कमर से बाईं और दाईं ओर झुकते हैं। इसे रीढ़ की लचक बढ़ाने वाला अभ्यास बताया गया है।
हस्तोत्तानासन करने का सही तरीका
शुरुआत में इस आसन को धीरे-धीरे करना चाहिए। शरीर को उसकी क्षमता से अधिक पीछे झुकाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
- समतल जगह पर सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच आरामदायक दूरी रखें।
- दोनों हाथों को शरीर के पास रखें और कंधों को ढीला छोड़ दें।
- सांस अंदर लेते हुए दोनों हाथों को धीरे-धीरे सिर के ऊपर उठाएं।
- हाथों को ऊपर की ओर खींचते हुए रीढ़ को लंबा रखने का प्रयास करें।
- सहज महसूस होने पर शरीर को हल्का पीछे झुका सकते हैं। कमर पर अनावश्यक दबाव न डालें।
- कुछ सेकंड सामान्य सांस लेते हुए स्थिति बनाए रखें और फिर धीरे-धीरे सीधा खड़े हो जाएं।
शुरुआत में कुछ दोहराव पर्याप्त हैं। अभ्यास के साथ अपनी क्षमता के अनुसार लगभग पांच मिनट का समय दिया जा सकता है। पांच मिनट की अवधि को किसी बीमारी के इलाज की प्रमाणित खुराक नहीं समझना चाहिए।
हस्तोत्तानासन के प्रमुख फायदे
| फायदा | शरीर पर संभावित प्रभाव |
|---|---|
| रीढ़ में लचीलापन | पीठ और रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों को खिंचाव मिलता है |
| अकड़न में कमी | लंबे समय तक बैठने के बाद सामान्य मांसपेशीय जकड़न कम महसूस हो सकती है |
| कंधों की गतिशीलता | हाथ ऊपर उठाने से कंधों और ऊपरी शरीर का अभ्यास होता है |
| शारीरिक सक्रियता | निष्क्रिय दिनचर्या के बीच हल्की गतिविधि का अवसर मिलता है |
| मानसिक ताजगी | सांस पर ध्यान देते हुए अभ्यास करने से आराम महसूस हो सकता है |
ये सामान्य संभावित लाभ हैं। गंभीर पीठ दर्द या किसी चिकित्सकीय समस्या में इस आसन को उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
क्या इससे पेट की चर्बी और वजन भी कम होता है?
हस्तोत्तानासन के दौरान पेट और धड़ की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो सकता है। लेकिन केवल इस आसन से पेट की चर्बी सीधे कम होने या वजन तेजी से घटने का पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
वजन नियंत्रित करने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और सक्रिय जीवनशैली जरूरी है।
इसी प्रकार वयस्कों में हस्तोत्तानासन से हड्डियों की लंबाई बढ़ने का प्रमाण नहीं है। हालांकि, शरीर की मुद्रा बेहतर होने पर व्यक्ति अधिक सीधा खड़ा दिखाई दे सकता है।
घंटों बैठकर काम करने वालों के लिए क्यों उपयोगी?
लंबे समय तक लगातार बैठने से शरीर की सक्रियता कम हो जाती है। ऐसे में बीच-बीच में खड़े होकर चलना और हल्की स्ट्रेचिंग करना उपयोगी हो सकता है।
WHO के अनुसार, वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता की शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। लंबे समय तक बैठे रहने की अवधि कम करना भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
हस्तोत्तानासन को दैनिक गतिविधियों के साथ शामिल किया जा सकता है, लेकिन पांच मिनट का योग पूरे दिन की शारीरिक निष्क्रियता की भरपाई नहीं कर सकता।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
योगाभ्यास के दौरान कुछ स्थितियों में विशेष सावधानी जरूरी है।
- पीठ या गर्दन में चोट: गंभीर दर्द, हाल की चोट या सर्जरी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
- चक्कर आने की समस्या: संतुलन बिगड़ने का खतरा हो सकता है। आयुष मंत्रालय की सामग्री में भी वर्टिगो होने पर ऊर्ध्व हस्तोत्तानासन से बचने की सलाह दी गई है।
- हृदय संबंधी गंभीर बीमारी: चिकित्सक और प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही अभ्यास करें।
- अभ्यास में दर्द: खिंचाव के दौरान तेज दर्द, सुन्नपन या चक्कर आने पर तुरंत रुक जाएं।
कब और कितनी देर करना चाहिए?
हस्तोत्तानासन सुबह या दिन में अपनी सुविधा के अनुसार किया जा सकता है। ऑफिस में लंबे समय तक काम करने वाले लोग भी थोड़ी जगह मिलने पर हल्का अभ्यास कर सकते हैं।
हालांकि, शुरुआत में शरीर की क्षमता के अनुसार कम समय तक अभ्यास करना बेहतर है। भोजन के तुरंत बाद गहरा पीछे झुकने से बचें और आरामदायक कपड़े पहनें।
नियमित योगाभ्यास के साथ टहलना, पर्याप्त नींद और संतुलित भोजन भी जरूरी है। इससे शरीर को सक्रिय रखने और स्वस्थ दिनचर्या बनाने में मदद मिल सकती है।

भारत में तिमाही पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के आधिकारिक आंकड़े जारी होने के बाद नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और आर्थशास्त्री राजीव कुमार ने भारत में रोजगार की स्थिति को लेकर बड़ी जानकारी दी है। उनके मुताबिक भारत में रोजगार का सृजन करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, 18 से 25 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर करीब 17 फीसदी है। वहीं, कुछ राज्यों में यह आंकड़ा और भी ज्यादा है। राज्यों में रोजगार के अवसर और उनकी चुनौतियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने बतााया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रोजगार और कमाई के अवसरों में कितना अंतर है।
उज्जैन के पश्चिम में ज्यादा मौके
राजीव कुमार ने कहा कि पूरे भारत की अर्थव्यवस्था को एक जैसा समझना सही नहीं है। इसके लिए उन्होंने उज्जैन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उज्जैन के पश्चिमी हिस्से में आर्थिक विकास की रफ्तार, रोजगार के अवसर और लोगों का जीवन स्तर पूर्वी हिस्से के मुकाबले बेहतर है। वहीं, पूर्वी हिस्से में काम की तलाश करने वाले लोग ज्यादा हैं और ये लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं।
गोवा की कमाई बिहार से 10 गुना ज्यादा
राज्यों में प्रति व्यक्ति आय का अंतर समझाने के लिए राजीव कुमार ने बिहार और गोवा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गोवा की प्रति व्यक्ति आय बिहार के मुकाबले करीब 10 गुना है। ऐसे में देश की आर्थिक स्थिति को केवल राष्ट्रीय आंकड़ों से समझने के बजाय हर राज्य की स्थिति अलग-अलग देखनी चाहिए।
ऐसे में उनके मुताबिक, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सरकार की नीतियों के जरिए इन राज्यों को ज्यादा संसाधन मिलने चाहिए। उन्होंने युवाओं को रोजगार के लायक हुनर सिखाने को भी बड़ी चुनौती बताया।
सरकारी आंकड़ों में क्या सामने आया?
सितंबर 2026 की PLFS रिपोर्ट के मुताबिक, 15 साल से अधिक उम्र के 55.5 फीसदी लोग लेबर फोर्स का हिस्सा बने, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ी बढ़त दर्शाता है। इसके साथ ही शहरों में भी शहरों में भी रोजगार और काम की मांग बढ़ी है। अगस्त 2026 के मुकाबले सितंबर 2026 में शहरी भागीदारी बढ़कर 50.7 फीसदी हो गई है। इसके अलावा महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 34.6 फीसदी पहुंच गई।
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव का पहला चरण आज, 16 जिला परिषदों और 104 पंचायत समितियों में होगा मतदान6,926 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे मतदाता, ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी हलचल तेज
जयपुर, 22 अक्टूबर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण के मतदान को लेकर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पहले चरण में 16 जिला परिषदों और 104 पंचायत समितियों के लिए मतदान होगा। इस चरण में कुल 6,926 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। मतदान के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पंचायतीराज चुनाव को ग्रामीण लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। इन चुनावों के माध्यम से ग्रामीण मतदाता अपने क्षेत्र के विकास और स्थानीय समस्याओं को सदन तक पहुंचाने वाले प्रतिनिधियों का चयन करते हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति स्तर पर चुने जाने वाले जनप्रतिनिधियों की भूमिका ग्रामीण विकास योजनाओं, स्थानीय सुविधाओं और क्षेत्रीय जरूरतों से जुड़े मुद्दों में महत्वपूर्ण होती है।

16 जिला परिषदों और 104 पंचायत समितियों पर नजर
पहले चरण में 16 जिला परिषदों और 104 पंचायत समितियों के लिए मतदान होना है। बड़ी संख्या में उम्मीदवार चुनावी मुकाबले में होने के कारण कई क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। प्रत्याशियों ने मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी है।
ग्रामीण विकास के मुद्दे रहेंगे महत्वपूर्ण
पंचायतीराज चुनावों में गांवों की सड़कें, पेयजल व्यवस्था, नालियां, सफाई, ग्रामीण विकास योजनाओं का क्रियान्वयन और अन्य बुनियादी सुविधाएं आमतौर पर प्रमुख मुद्दे रहते हैं। मतदाता अपने क्षेत्र की जरूरतों और उम्मीदवारों के स्थानीय कार्यों को ध्यान में रखकर मतदान कर सकते हैं।
मतदान व्यवस्था पर प्रशासन की जिम्मेदारी
मतदान के दौरान चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाए रखना प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारी होगी। मतदान केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं, चुनाव कर्मचारियों की तैनाती और सुरक्षा संबंधी इंतजाम चुनाव प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं। मतदाताओं से भी अपेक्षा है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग करें।
6,926 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य से जुड़ा पहला चरण
पहले चरण में चुनाव लड़ रहे 6,926 उम्मीदवारों के लिए यह मतदान महत्वपूर्ण है। हालांकि, उम्मीदवारों की जीत-हार का फैसला आधिकारिक मतगणना और परिणाम घोषित होने के बाद ही स्पष्ट होगा। चुनाव परिणामों से संबंधित जानकारी के लिए निर्वाचन विभाग की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है।
पंचायतीराज चुनावों में ग्रामीण मतदाताओं की भागीदारी स्थानीय शासन को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है। पहले चरण का मतदान राज्य की चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
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जैसलमेर में गोडावण का दर्दनाक अंत! जंगल में छोड़े जाने के 4 दिन बाद मरु लोमड़ी ने किया शिकार14 अक्टूबर को डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़ा था 6 महीने का गोडावण, 18 अक्टूबर को पानी पीने गया तो झाड़ियों में छिपी लोमड़ी ने किया हमला
जैसलमेर | राष्ट्रीय जनादेश (RJN)
जैसलमेर। राजस्थान में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके दुर्लभ पक्षी गोडावण के संरक्षण अभियान को बड़ा झटका लगा है। जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में प्राकृतिक वातावरण में जीवन बिताने के लिए छोड़े गए छह महीने के गोडावण का मरु लोमड़ी ने शिकार कर लिया। ब्रीडिंग सेंटर में तैयार किए गए इस गोडावण को 14 अक्टूबर को जंगल में छोड़ा गया था। महज चार दिन बाद, 18 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए वैज्ञानिकों को इस घटना का पता चला।
पानी पीने गया था गोडावण, झाड़ियों में घात लगाए बैठी थी लोमड़ी
जानकारी के अनुसार, 18 अक्टूबर को गोडावण जैसलमेर के सम इलाके में एक कुंड पर पानी पीने गया था। इसी दौरान आसपास की झाड़ियों में छिपी मरु लोमड़ी ने उस पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में छह महीने का यह दुर्लभ पक्षी अपनी जान नहीं बचा सका।
गोडावण की गतिविधियों पर सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए नजर रखी जा रही थी। इसी तकनीकी निगरानी के दौरान वैज्ञानिकों को पक्षी के साथ हुई इस घटना की जानकारी मिली। संरक्षण के उद्देश्य से जंगल में छोड़े गए गोडावण की इतनी कम अवधि में मौत ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रयासों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
14 अक्टूबर को छोड़ा, 18 अक्टूबर को खत्म हो गया सफर
इस गोडावण को 14 अक्टूबर को डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़ा गया था। उद्देश्य था कि ब्रीडिंग सेंटर में तैयार होने के बाद वह अपने प्राकृतिक आवास में रह सके। वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि वह धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल हो जाएगा, लेकिन चार दिन बाद ही शिकारी जानवर के हमले में उसकी मौत हो गई।
यह घटना बताती है कि दुर्लभ पक्षियों को प्रजनन केंद्रों में तैयार कर प्राकृतिक आवास में छोड़ने के साथ उनकी सुरक्षा और निगरानी भी बेहद महत्वपूर्ण है।
सैटेलाइट ट्रैकिंग बनी घटना का पता लगाने का माध्यम
गोडावण की गतिविधियों पर वैज्ञानिक सैटेलाइट ट्रैकिंग के माध्यम से नजर रख रहे थे। इस तकनीक से पक्षी की गतिविधियों पर निगरानी रखने और उसके बारे में जानकारी जुटाने में मदद मिलती है। इसी निगरानी के जरिए इस गोडावण के शिकार की घटना सामने आई।
हालांकि, इस घटना से यह सवाल भी उठता है कि प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने वाले गोडावण को शिकारी जानवरों से बचाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को किस तरह और प्रभावी बनाया जा सकता है।
सात अन्य गोडावण को छोड़ने की योजना टली
इस घटना के बाद सात अन्य गोडावण को जंगल में छोड़ने का कार्यक्रम टाल दिया गया। अब संरक्षण अभियान के तहत पक्षियों की सुरक्षा, प्राकृतिक वातावरण में उनके अनुकूलन और निगरानी व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
गोडावण की संख्या बढ़ाना संरक्षण अभियान का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है, लेकिन जंगल में छोड़े जाने के बाद उनके जीवित रहने और सुरक्षित रहने की चुनौती भी उतनी ही बड़ी है।
गोडावण को बचाना क्यों जरूरी?
गोडावण, जिसे अंग्रेजी में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कहा जाता है, भारत के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शामिल है। राजस्थान के मरुस्थलीय और घास के मैदानी क्षेत्र इसके प्रमुख प्राकृतिक आवासों में हैं। इसकी घटती संख्या के कारण संरक्षण कार्यक्रमों के तहत प्रजनन केंद्रों में इनकी संख्या बढ़ाने और फिर प्राकृतिक आवास में छोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
ऐसे में छह महीने के गोडावण की मौत संरक्षण अभियान के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यह घटना याद दिलाती है कि दुर्लभ वन्यजीवों को बचाने के लिए प्रजनन, सुरक्षित पुनर्वास, वैज्ञानिक निगरानी और प्राकृतिक आवास में उनकी सुरक्षा पर एक साथ काम करना आवश्यक है।
राष्ट्रीय जनादेश (RJN)
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बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर जिले में देर रात सवारियों से भरी बस में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। हादसा राजमार्ग संख्या 62 पर महाजन से लालेरा के बीच हुआ। घटना देर रात करीब डेढ़ बजे की बताई जा रही है। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरी बस आग की लपटों में घिर गई।
हादसे के वक्त अधिकतर यात्री नींद में थे। आग लगते ही बस में सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। यात्रियों ने किसी तरह बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। गनीमत रही कि सभी यात्री समय रहते बस से बाहर निकल गए। आग लगने से बस पूरी तरह जलकर राख हो गई। घटना के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
भरतपुर में 2 जुड़वा भाइयों की बेरहमी से हत्या, मां के साथ ननिहाल में रह रहे थे दोनों बच्चेडीग जिले के जनूथर थाना क्षेत्र के बड़ेसरा गांव में मंगलवार को दो जुड़वा भाइयों के शव मिलने से सनसनी फैल गई। दोनों बालकों के शव गांव में ज्वार-बाजरे की पुंज के पास मिलने की सूचना पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया, वहीं पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के मुताबिक, दोनों किशोर अपनी मां के साथ ननिहाल में रह रहे थे। उनकी उम्र करीब 13 वर्ष बताई जा रही है। दोनों के शव मिलने की सूचना पर जनूथर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीग पुलिस अधीक्षक शरण कांबले और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अकलेश शर्मा भी मौके पर पहुंचे।
एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य, डॉग स्क्वायड भी बुलाया
पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल टीम को बुलाया। वहीं, शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने से पहले ग्रामीणों ने मौके पर डॉग स्क्वॉयड बुलाने की मांग की। इसके बाद पुलिस ने डॉग स्क्वॉयड की मदद से जांच शुरू की।

डीग पुलिस अधीक्षक शरण कांबले ने बताया कि जनूथर थाना पुलिस को बड़ेसरा गांव में ज्वार की पुंज के पास दो जुड़वा बच्चों के शव पड़े होने की सूचना मिली थी। इस पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों बालकों की पहचान की। सूचना मिलने के बाद वह भी घटनास्थल पर पहुंचे। फिलहाल, पुलिस दोनों की मौत के कारणों का पता लगाने में जुटी है।
मौत के कारणों का पता लगाने में जुटी पुलिस
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, परिवार में तीन भाई और एक बहन हैं। दोनों किशोर अपने ननिहाल में रह रहे थे। हालांकि, दोनों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इसका अभी खुलासा नहीं हो पाया है।

पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर मौत के कारणों का पता चल सकेगा। घटना के बाद से बड़ेसरा गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

जयपुर के कैफे पर पुलिस की रेड, 26 युवक-युवतियां पकड़ेकैफे की आड़ में चल रहा था हुक्का बार, मैनेजर विक्रम सिंह के खिलाफ FIR दर्ज
जयपुर | 20 अक्टूबर 2026 | राष्ट्रीय जनादेश
जयपुर। राजधानी जयपुर में कैफे की आड़ में हुक्का बार संचालित किए जाने के मामले में आदर्श नगर थाना पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस की दबिश के दौरान कैफे से 26 युवक-युवतियों को पकड़ा गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कार्रवाई के समय मौके पर युवा नशा करते मिले।
कैफे में पुलिस की दबिश से मचा हड़कंप
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने कैफे पर छापा मारकर मौके पर मौजूद युवक-युवतियों के संबंध में कार्रवाई की। कैफे की गतिविधियों को लेकर पुलिस ने जांच की। इस कार्रवाई के बाद इलाके में कैफे की आड़ में हुक्का बार संचालित किए जाने को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
मैनेजर के खिलाफ कोटपा एक्ट में FIR
आदर्श नगर थाना पुलिस ने कैफे मैनेजर विक्रम सिंह, निवासी राजापार्क, आदर्श नगर, जयपुर के खिलाफ कोटपा एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
कोटपा एक्ट यानी सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 के तहत तंबाकू उत्पादों के इस्तेमाल, बिक्री और विज्ञापन से संबंधित विभिन्न प्रावधान लागू होते हैं। मामले में किन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हुई है, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध होने पर कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कैफे की आड़ में चल रही गतिविधियों पर सवाल
इस घटना ने शहर में कैफे और अन्य मनोरंजन स्थलों पर संचालित गतिविधियों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य नियमों के उल्लंघन पर रोक लगाना और कानून के मुताबिक कार्रवाई करना है।
राष्ट्रीय जनादेश की नजर: जयपुर में कैफे की आड़ में कथित रूप से चल रहे हुक्का बार पर पुलिस की कार्रवाई चर्चा में है। मामले में आगे की पुलिस कार्रवाई और जांच से जुड़े तथ्यों पर नजर बनी हुई है।




भारत में दशहरा यानी विजयादशमी को आमतौर पर भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व की परंपराएं काफी अलग हैं। कहीं सजे हुए हाथियों के साथ शाही शोभायात्रा निकलती है, तो कहीं सैकड़ों देवी-देवताओं की पालकियां एक जगह जुटती हैं। पश्चिम बंगाल में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के साथ उत्सव का समापन होता है, जबकि छत्तीसगढ़ के बस्तर में दशहरा लंबे समय तक चलने वाले आदिवासी उत्सव के रूप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं देश की 5 ऐसी जगहों के बारे में, जहां दशहरे का अंदाज सबसे अलग है।
1. मैसूर: शाही अंदाज में मनाया जाता है दशहरा
कर्नाटक के मैसूर का दशहरा अपनी भव्यता और ऐतिहासिक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां उत्सव का संबंध देवी चामुंडेश्वरी की महिषासुर पर विजय से है। दशहरे के दौरान मैसूर पैलेस को रोशनी से सजाया जाता है और शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
विजयादशमी के अवसर पर निकलने वाली जंबू सवारी यहां के उत्सव का मुख्य आकर्षण है। इस शोभायात्रा में सजे हुए हाथी, पारंपरिक झांकियां, संगीत और लोककलाओं की झलक देखने को मिलती है। देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को विशेष रूप से सजाए गए स्वर्ण हौदे में विराजमान किया जाता है।
2. कुल्लू: जहां एक जगह जुटते हैं सैकड़ों देवी-देवता
हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में दशहरा देश के अन्य हिस्सों से अलग तरीके से मनाया जाता है। यहां उत्सव विजयादशमी के दिन शुरू होता है और लगभग एक सप्ताह तक चलता है। जब देश के कई हिस्सों में दशहरा उत्सव का समापन होता है, तब कुल्लू में इसकी शुरुआत होती है।
ढालपुर मैदान में आसपास के गांवों से सैकड़ों देवी-देवताओं की सुसज्जित पालकियां पहुंचती हैं। स्थानीय लोग अपने आराध्य देवताओं को पारंपरिक वाद्ययंत्रों और धार्मिक जुलूसों के साथ लेकर आते हैं। भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा इस आयोजन का प्रमुख हिस्सा है।
कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश की देव परंपरा, लोकसंस्कृति और सामुदायिक जीवन का अनूठा उदाहरण है। यहां का उत्सव आसपास के गांवों के लोगों के एक साथ जुटने का अवसर भी देता है।
3. कोलकाता: दुर्गा पूजा का भावुक समापन
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में विजयादशमी दुर्गा पूजा के समापन से जुड़ी है। यहां नवरात्रि के दौरान भव्य पंडाल सजाए जाते हैं और देवी दुर्गा की प्रतिमाओं की पूजा की जाती है। विजयादशमी पर प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ उत्सव का समापन होता है।
इस दिन सिंदूर खेला की परंपरा भी विशेष रूप से देखने को मिलती है। इसमें विवाहित महिलाएं देवी दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं और एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इसे देवी की विदाई और उनके सुख-समृद्धि के आशीर्वाद से जुड़ी परंपरा माना जाता है।
ढाक की गूंज, पारंपरिक पूजा और विसर्जन के दौरान भावुक विदाई कोलकाता की विजयादशमी को खास बनाती है। यहां दशहरे का रंग रावण दहन से अधिक देवी दुर्गा की आराधना और विदाई से जुड़ा है।
4. दिल्ली: रामलीला और रावण दहन का आकर्षण
दिल्ली में दशहरे का सबसे बड़ा आकर्षण रामलीला और रावण दहन है। शहर के विभिन्न मैदानों में भगवान श्रीराम की कथा का मंचन किया जाता है। नवरात्रि के दिनों में रामलीला के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंग दिखाए जाते हैं।
विजयादशमी पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। कई स्थानों पर मेले, खानपान के स्टॉल और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। परिवारों के साथ लोग रामलीला देखने और रावण दहन में शामिल होने पहुंचते हैं।
दिल्ली में यह परंपरा भगवान श्रीराम की विजय और अहंकार पर धर्म की जीत का संदेश देती है। अलग-अलग इलाकों की रामलीलाओं में मंच सज्जा, संवाद और आयोजन की शैली भी अलग देखने को मिलती है।
5. बस्तर: 75 दिनों तक चलने वाला अनोखा दशहरा
छत्तीसगढ़ के बस्तर में दशहरा अपनी विशिष्ट आदिवासी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां का बस्तर दशहरा सामान्य दशहरे से काफी अलग है। इसकी परंपरा का प्रमुख संबंध मां दंतेश्वरी की आराधना और स्थानीय जनजातीय संस्कृति से है।
यह उत्सव परंपरागत रूप से लगभग 75 दिनों तक चलने के लिए जाना जाता है। इसमें विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पारंपरिक रस्में और सामुदायिक आयोजन शामिल होते हैं। स्थानीय समुदाय इस उत्सव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और कई रस्में पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के अनुसार निभाई जाती हैं।
बस्तर दशहरे की सबसे खास बात यह है कि इसका केंद्र रावण दहन नहीं, देवी दंतेश्वरी की पूजा और स्थानीय देव परंपराएं हैं। यह आयोजन क्षेत्र की आदिवासी पहचान और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
हर जगह अलग, लेकिन संदेश एक
मैसूर की शाही जंबू सवारी, कुल्लू की देव परंपरा, कोलकाता की दुर्गा पूजा, दिल्ली की रामलीला और बस्तर का लंबा आदिवासी उत्सव दिखाते हैं कि भारत में दशहरा एक ही तरीके से नहीं मनाया जाता। क्षेत्रीय मान्यताओं, इतिहास और लोकसंस्कृति के अनुसार इसकी परंपराएं बदलती हैं।
इन सभी आयोजनों में धार्मिक आस्था, सामुदायिक भागीदारी और सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण भूमिका है। यही विविधता विजयादशमी को देश के अलग-अलग हिस्सों में विशिष्ट पहचान देती है।
Barmer Road Accident: बाड़मेर शहर से होकर गुजरने वाले जैसलमेर रोड पर नवले की चक्की के पास सोमवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में ओपन जेल के दो कैदियों की मौत हो गई। हाईवे पर मृत पशु से टकराने के बाद कार बेकाबू हो गई और डिवाइडर की रेलिंग तोड़ते हुए सामने से आ रहे डंपर से भिड़ गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह पिचक गया और उसमें सवार दोनों कैदी अंदर फंस गए। आसपास के लोगों ने कड़ी मशक्कत कर उन्हें बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। हादसे की सूचना पर रीको थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनाक्रम की जानकारी जुटाई।
रीको पुलिस के अनुसार, हादसे में जैसलमेर के देवा गांव निवासी महेंद्र पुत्र राणाराम और सुजाराम पुत्र धर्माराम की मौत हुई है। दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव राजकीय अस्पताल की मोर्चरी में रखवाए गए हैं। पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने मौका रिपोर्ट तैयार कर हादसे की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर अंधेरे के कारण हादसा होने की आशंका जताई जा रही है।
सुबह दर्ज करवाई हाजिरी, शाम को हादसे में मौत
हादसे में जान गंवाने वाले दोनों युवक बाड़मेर जिला कारागृह की खुली जेल में रह रहे थे। दोनों हत्या के मामलों में सजा काट रहे थे। महेंद्र वर्ष 2019 से और सुजाराम वर्ष 2025 के बाद से खुली जेल में रह रहे थे। यहां महेंद्र अपनी पत्नी के साथ रहता था। सोमवार सुबह दोनों ने जेल प्रशासन के उपस्थिति रजिस्टर में हाजिरी दर्ज करवाई और मजदूरी के लिए निकल गए। शाम को जैसलमेर रोड पर हुए हादसे में दोनों की मौत हो गई।
कार में बुरी तरह फंसे, लोहे की चादर हटाकर निकाला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और दोनों युवक अंदर फंस गए। आसपास मौजूद लोगों ने कार का गेट और लोहे की चादर हटाकर उन्हें बाहर निकाला। इसके बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लेकर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू की।
EVM स्ट्रांग रूम की सुरक्षा में तैनात RAC जवान ने खुद को मारी गोली, मौत; पत्नी भी है पुलिस मेंAjmer EVM Security Guard Shoots: अजमेर जिले के माखूपुरा स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में पंचायतीराज आम चुनाव 2026 के लिए बनाए गए स्ट्रांग रूम की सुरक्षा में तैनात आरएसी के एक जवान ने गोली मार ली। गोली लगने से जवान की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सिटी) हिमांशु जांगिड़ सहित पुलिस के आला अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे।
आरएसी का जवान था नरेंद्र गोदारा
जानकारी के मुताबिक, माखूपुरा स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में पंचायतीराज आम चुनाव 2026 के मद्देनजर स्ट्रांग रूम बनाया गया है। इसकी सुरक्षा के लिए आरएसी के जवान नरेंद्र गोदारा को तैनात किया गया था। सोमवार शाम करीब 5:30 बजे स्ट्रांग रूम के बाहर ड्यूटी के दौरान यह घटना हुई। गोली चलने की आवाज सुनते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल और एमओबी की टीमों को भी मौके पर बुलाया गया। दोनों टीमों ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला के मुताबिक, पॉलिटेक्निक कॉलेज में चुनाव संबंधी स्ट्रांग रूम बनाया गया है। इसकी सुरक्षा के लिए 9वीं आरएसी टोंक की ए-कंपनी को 16 अक्टूबर से तैनात किया गया था। इसी कंपनी में कार्यरत 2018 बैच के कांस्टेबल नरेंद्र गोदारा सोमवार शाम ड्यूटी पर तैनात थे।

पत्नी अजमेर पुलिस में है कांस्टेबल
आरएसी जवान नरेंद्र गोदारा की भर्ती साल 2018 में हुई थी। वह अजमेर में किराए के मकान में रहते थे। सोमवार शाम करीब 5:30 बजे ड्यूटी की शिफ्ट बदलने के दौरान यह घटना हुई। गोली लगने से जवान गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। नरेंद्र की पत्नी अजमेर पुलिस में कांस्टेबल हैं।
आत्महत्या के कारणों की जांच में जुटी पुलिस
एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया, जवान ने यह कदम किन कारणों से उठाया, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सिटी) हिमांशु जांगिड़ और आदर्श नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। फिलहाल, पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और अन्य परिस्थितियों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

जैसलमेर के पोकरण में मारपीट की जांच करने गई पुलिस टीम पर हमला, कटर से काटा सिपाही का कानपोकरण (जैसलमेर): जैसलमेर जिले में पोकरण कस्बे के भवानीप्रोल में मारपीट के मामले की सोमवार शाम जांच करने गई पुलिस टीम पर आरोपी और परिवार ने लोगों ने हमला कर दिया। इस दौरान एक कांस्टेबल चालक का कान कटर से काट दिया गया। पुलिस के अनुसार, सोमवार को सुबह भवानीप्रोल निवासी जय पुत्र देवीलाल भार्गव ने रिपोर्ट दी थी कि घर जाते समय भवानीप्रोल निवासी रमेश पुत्र चैनाराम प्रजापत ने उसका रास्ता रोककर मारपीट की थी।
रिपोर्ट के आधार पर हेड कांस्टेबल रूपाराम, कांस्टेबल चालक चतुराराम और एक अन्य कांस्टेबल मामले की जांच के लिए सोमवार शाम भवानीप्रोल पहुंचे। जब पुलिस बल आरोपी के घर गया तो रमेश, नारायणराम और राधेश्याम पुत्र चैनाराम ने पुलिस टीम से उलझने लगे। कुछ देर में विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया।
काट दिया कांस्टेबल का कान
आरोपियों ने कांस्टेबल चालक चतुराराम को बातचीत के दौरान ही नीचे गिरा दिया। यहां पास ही चल रहे भवन निर्माण कार्य स्थल पर कटर पड़ा था। आरोपियों ने कटर चालू कर कांस्टेबल चालक चतुराराम का कान काट दिया। अन्य पुलिसकर्मियों ने उसे छुड़ाया। इस दौरान उनके साथ भी आरोपियों ने धक्का-मुक्की की।
मच गया हड़कंप, एक आरोपी दस्तयाब
कांस्टेबल चालक चतुराराम को तत्काल पोकरण के राजकीय अस्पताल लाया गया। यहां उसका उपचार किया गया। इस दौरान थानाधिकारी मनीष सोनी ने घटना की जानकारी ली। घटना से पुलिस थाने सहित क्षेत्र में हड़कंप मच गया। पुलिस टीम ने राधेश्याम प्रजापत को दस्तयाब किया। थानाधिकारी सोनी ने बताया कि अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
की जा रही जांच…
एक युवक के साथ हुई मारपीट के मामले में पुलिस टीम सोमवार शाम जांच के लिए गई थी। इस दौरान आरोपी और उसके भाइयों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। कांस्टेबल चालक का कान कटर से काटा गया है। एक आरोपी को दस्तयाब किया है, मामले में जांच की जा रही है।
-मनीष सोनी, थानाधिकारी पुलिस थाना, पोकरण

जयपुर में अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह का पर्दाफाश, 3 आरोपी गिरफ्तारमेवात भेजते थे चोरी के मोबाइल, साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने की बात; पुलिस ने 19 मोबाइल किए बरामद
जयपुर | 19 अक्टूबर 2026
जयपुर। राजधानी जयपुर में मोबाइल चोरी के मामलों को लेकर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से चोरी के 19 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह चोरी के मोबाइल फोन मेवात क्षेत्र में भेजता था, जहां इनका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड जैसी आपराधिक गतिविधियों में किए जाने की बात सामने आई है।
इस कार्रवाई की जानकारी डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने दी। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर मोबाइल चोरी की घटनाओं, फोन की खरीद-फरोख्त और गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों के संबंध में जानकारी जुटा रही है।
तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
मोईन उर्फ शाहरुख (25 वर्ष) — निवासी काफला टोक, वर्तमान पता जुलाहों का मोहल्ला, रामगंज, जयपुर।
मोहम्मद अनस (28 वर्ष) — निवासी कुंडलाव कॉलोनी, जयपुर।
हसीब मेव (22 वर्ष) — निवासी नगीना, हरियाणा; वर्तमान पता शारदा कॉलोनी, जयसिंहपुरा खोर, जयपुर।
पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। उनके कब्जे से 19 मोबाइल फोन बरामद होना इस कार्रवाई का अहम हिस्सा है। बरामद मोबाइल किन-किन मामलों से जुड़े हैं, इसकी जानकारी जांच के आधार पर सामने आएगी।
मेवात तक फैला था मोबाइल सप्लाई का नेटवर्क
पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, गिरोह चोरी किए गए मोबाइल फोन को मेवात क्षेत्र में भेजता था। इससे मोबाइल चोरी के मामलों में दूसरे क्षेत्रों तक फैले नेटवर्क की आशंका सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी के फोन किस माध्यम से आगे पहुंचाए जाते थे और उन्हें खरीदने वाले लोग कौन थे।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बरामद 19 मोबाइल फोन किन लोगों के हैं और क्या वे जयपुर में दर्ज मोबाइल चोरी की शिकायतों से मेल खाते हैं।
साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल की आशंका
चोरी के मोबाइल फोन का इस्तेमाल साइबर अपराधों में किए जाने की आशंका के चलते मामला और गंभीर हो जाता है। ऐसे फोन का इस्तेमाल संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों में हो सकता है। हालांकि, इस मामले में किन विशिष्ट साइबर अपराधों में मोबाइल इस्तेमाल किए गए, इसकी पुष्टि जांच और पुलिस के आधिकारिक विवरण से ही होगी।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश पर नजर
तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने गिरोह की पूरी कार्यप्रणाली का पता लगाने की चुनौती है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि आरोपी कब से मोबाइल चोरी के नेटवर्क से जुड़े थे, चोरी के फोन कहां से हासिल किए जाते थे और उन्हें दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाने में कौन-कौन शामिल था।
पुलिस की पूछताछ से मोबाइल चोरी की अन्य घटनाओं और संभावित खरीदारों के बारे में भी अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है।
आमजन के लिए जरूरी सावधानी
मोबाइल चोरी होने पर तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। फोन का IMEI नंबर सुरक्षित रखें और भारत सरकार के संचार साथी पोर्टल के जरिए मोबाइल ब्लॉक कराने की प्रक्रिया अपनाएं। मोबाइल से जुड़े बैंकिंग खातों और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं को भी सुरक्षित करें।
राष्ट्रीय जनादेश की नजर: जयपुर में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और 19 मोबाइल फोन की बरामदगी के बाद अब जांच का फोकस चोरी के मोबाइल की सप्लाई चेन और संभावित साइबर अपराध नेटवर्क पर रहेगा।
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पाली में गम-ग्वार फैक्ट्री में भीषण आग, तीन युवक झुलसे; दो मजदूरों की तलाश जारीलपटों के बीच मची चीख-पुकार, ‘बचाओ-बचाओ’ चिल्लाते हुए बाहर निकले लोग; हादसे के बाद इलाके में मचा हड़कंप
पाली, राजस्थान | 19 अक्टूबर 2026 | राष्ट्रीय जनादेश
पाली। राजस्थान के पाली जिले में गम-ग्वार की एक फैक्ट्री में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। फैक्ट्री में आग की लपटें उठने के बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी फैल गई। आग इतनी भयावह बताई जा रही है कि जान बचाने के लिए लोग ‘बचाओ-बचाओ’ चिल्लाते हुए बाहर निकलने लगे। इस हादसे में तीन युवक झुलस गए, जबकि दो मजदूरों की तलाश की जा रही है।
आग लगते ही मची अफरा-तफरी
जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री में अचानक आग लगने के बाद देखते ही देखते स्थिति गंभीर हो गई। आग की लपटों और धुएं के बीच वहां काम कर रहे लोगों को अपनी जान बचाने के लिए बाहर निकलने की कोशिश करनी पड़ी। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के क्षेत्र में भी हड़कंप की स्थिति बन गई।
फैक्ट्री में आग की खबर फैलते ही लोगों का ध्यान घटनास्थल की ओर गया। हादसे की गंभीरता को देखते हुए वहां मौजूद लोगों में अपने साथियों को सुरक्षित बाहर निकालने की चिंता बनी रही।
तीन युवक झुलसे, दो मजदूरों की तलाश
इस अग्निकांड में तीन युवकों के झुलसने की सूचना है। आग की चपेट में आने से घायल हुए युवकों को लेकर विस्तृत जानकारी, उनकी स्थिति और उपचार संबंधी आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
वहीं, हादसे के बाद दो मजदूरों की तलाश की जा रही है। उनकी तलाश की स्थिति और यह स्पष्ट होना बाकी है कि वे आग के दौरान फैक्ट्री के भीतर ही थे या सुरक्षित बाहर निकलने में सफल हुए। लापता मजदूरों की जानकारी सामने आने के बाद हादसे की गंभीरता को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
आग लगने के कारणों का इंतजार
फैक्ट्री में आग कैसे लगी, इसकी वजह क्या रही और आग से कितना नुकसान हुआ, इन सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं। आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
फैक्ट्री में हुए इस हादसे ने औद्योगिक इकाइयों में आग से बचाव के इंतजाम और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। ऐसी घटनाओं में समय पर बचाव कार्य, अग्निशमन व्यवस्था और आपातकालीन निकासी की सुविधा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। आग जैसी आपात स्थिति में सुरक्षित निकास, अग्निशमन उपकरण और कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।
फिलहाल इस घटना में सबसे अहम सवाल दो लापता मजदूरों का पता लगाने और झुलसे युवकों की स्थिति से जुड़ा है। हादसे के संबंध में प्रशासनिक कार्रवाई, आग के कारण और नुकसान का आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
राष्ट्रीय जनादेश की नजर इस घटना से जुड़ी आगे की जानकारी पर बनी हुई है।
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हनुमानगढ़ जिले में तीन बड़ी कार्रवाई : 50 करोड़ से अधिक की हेरोइन व 70 लाख की शराब बरामद, 8 आरोपी गिरफ्तारहनुमानगढ़। जिले में नशा तस्करी के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 50 करोड़ रुपए की हेरोइन और लगभग 70 लाख रुपए की अवैध शराब जब्त की है। अलग-अलग कार्रवाइयों में दो महिलाओं सहित छह लोगों को हेरोइन तस्करी और दो आरोपियों को शराब तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने हेरोइन के साथ 1.85 लाख रुपए नकद भी जब्त किए हैं। हेरोइन की एक बड़ी खेप पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए सीमा क्षेत्र में गिराए जाने की आशंका है, जिसे पंजाब पहुंचाने की तैयारी थी।
श्रीगंगानगर जिला पुलिस की डीएसटी और हनुमानगढ़ की गोलूवाला थाना पुलिस ने रविवार को गांव अयालकी के पास नहर किनारे घेराबंदी कर दो वाहनों की तलाशी ली। इस दौरान 19 पैकेट में रखी 9 किलो 821 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 50 करोड़ रुपए आंकी गई है। पुलिस ने 1 लाख 85 हजार रुपए नकद भी जब्त किए।
पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए गिराने की आशंका
गिरफ्तार आरोपियों में हासन अली (32), उसकी पत्नी रवीना (20), मां गुलजारा (50) और जालंधर निवासी बलविंदर सिंह शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि खेप को रायसिंहनगर सीमा क्षेत्र के आसपास पाकिस्तानी ड्रोन के जरिए गिराया गया था। इसके बाद इसे श्रीविजयनगर और गोलूवाला होते हुए पंजाब पहुंचाया जाना था। पुलिस खेप के स्रोत और संभावित खरीदारों की पड़ताल कर रही है।

दो महिलाओं से 51.37 ग्राम हेरोइन बरामद
एक अन्य कार्रवाई में जंक्शन थाना पुलिस ने ऑपरेशन चक्रव्यूह के तहत पंजाब निवासी दो महिलाओं को 51.37 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया। जब्त मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपए बताई गई है। आरोपियों की पहचान रीना रानी (26), निवासी फिरोजपुर, और सिमरजीत कौर (32), निवासी मुक्तसर, पंजाब के रूप में हुई है। पुलिस दोनों से चिट्टे की खरीद और सप्लाई के संबंध में पूछताछ कर रही है। इस कार्रवाई में डीएसटी सेक्टर हनुमानगढ़ की विशेष भूमिका रही।

सब्जियों की आड़ में गुजरात जा रही थी शराब
हनुमानगढ़ टाउन थाना पुलिस ने भारतमाला रोड पर नाकाबंदी के दौरान चंडीगढ़ निर्मित अंग्रेजी शराब से भरा कंटेनर जब्त किया। सब्जियों के कैरेट की आड़ में शराब गुजरात ले जाई जा रही थी। कंटेनर से 380 पेटी शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 70 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस ने चालक विनोद कुमार (26), निवासी श्रीगंगानगर, और संजय उर्फ सज्जू (20), निवासी हनुमानगढ़, को गिरफ्तार किया। दोनों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के निर्देशन में हुई इन कार्रवाइयों के बाद पुलिस अब मादक पदार्थों और अवैध शराब की सप्लाई के नेटवर्क की जांच में जुटी है। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संभावित तस्करों और खेप के गंतव्य का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

लग्जरी कार से 1.5 करोड़ की पकड़ी गई स्मैक, कोटा के 6 आरोपी गिरफ्तार, 3 संदिग्ध मौके से फरारदौसा। राजस्थान में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दौसा में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भांडारेज के पास पुलिस ने 293.5 ग्राम स्मैक जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब 1.50 करोड़ रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रही काले रंग की कार को जब्त करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, स्मैक की खेप लेने पहुंचे सिकंदरा क्षेत्र के तीन संदिग्ध पुलिस को चकमा देकर मौके से फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।
यह कार्रवाई जयपुर रेंज पुलिस के ऑपरेशन ‘एंटी वेनम’ के तहत की गई। महानिरीक्षक पुलिस राहुल प्रकाश के निर्देशन, आईपीएस नितिन चौधरी के पर्यवेक्षण और दौसा पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया के मार्गदर्शन में जयपुर रेंज साइबर सेल, दौसा डीएसटी और सदर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने इसे अंजाम दिया। पुलिस ने इस संबंध में सदर थाना दौसा में मामला दर्ज किया है।
साइबर सेल की सूचना पर बिछाया जाल
पुलिस के अनुसार, जयपुर रेंज साइबर सेल को सूचना मिली थी कि कोटा निवासी अहसान और शोएल अली स्मैक की खेप लेकर दौसा के भांडारेज पुलिया के पास पहुंचने वाले हैं। यहां उनकी मुलाकात सिकंदरा थाना क्षेत्र के लक्ष्मण सैनी, केदार सैनी और दिनेश सैनी से होनी थी। सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने इलाके में निगरानी शुरू की। पुलिस की गतिविधियों का पता चलते ही तीनों संदिग्ध मौके से फरार हो गए। पुलिस अब उनकी तलाश कर रही है।
कोटा निवासी छह आरोपी गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अहसान पुत्र अंसार अली (30), शोएल अली पुत्र शाहिद अली (32), शाहनवाज खान पुत्र जाकिर खान (29), मुकीम पुत्र उमर मोहम्मद (29), शाहरुख पुत्र शाकिर हुसैन (31) और मोहम्मद शोयल उर्फ बल्लू पुत्र शरीफ खान (29) को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 293.5 ग्राम स्मैक बरामद की गई। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि मादक पदार्थ की आपूर्ति के स्रोत और तस्करी में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।
कई जिलों तक फैले नेटवर्क की आशंका
प्रारंभिक जांच में पुलिस को तस्करी के नेटवर्क के राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों तक जुड़े होने की आशंका है। जयपुर, अजमेर, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर सहित अन्य क्षेत्रों में मादक पदार्थों की आपूर्ति के संभावित कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं। पुलिस खरीद-फरोख्त, वित्तीय लेनदेन और खेप की डिलीवरी से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।
पत्नी की भूमिका भी जांच के दायरे में
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी अहसान के खिलाफ पहले भी मादक पदार्थों से जुड़े मामले दर्ज हैं। इनमें वर्ष 2023 का बूंदी कोतवाली, वर्ष 2025 का कोटा के किशोरपुरा और वर्ष 2026 का दौसा के बांदीकुई का प्रकरण शामिल बताया गया है। उसकी पत्नी शिवानी कंवर की भूमिका की भी जांच की जा रही है। हालांकि, इस संबंध में जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। मामले में बसवा थानाधिकारी नरेश शर्मा को जांच अधिकारी बनाया गया है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से पूछताछ के जरिए तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

राजस्थान में हृदयविदारक घटना आई सामने, मासूम बच्चों की हत्या के बाद मां ने भी दी जानअलवर18 अक्टूबर2026। अलवर जिले के खेरली कस्बे के निकटवर्ती दांतिया गांव में रविवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई। यहां ऊषा शर्मा ने अपने पांच वर्षीय बेटे मुकुल और चार वर्षीय बेटी नंदनी उर्फ लाड़ो पर कैंची से वार कर दिया। इसके बाद ऊषा ने खुद को भी घायल कर लिया। घटना में दोनों मासूम बच्चों और उनकी मां की मौत हो गई, जबकि बीच-बचाव के दौरान सदमे में आई और गंभीर रूप से घायल हुई ऊषा की छोटी बहन मनीषा को बेहतर उपचार के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया है। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ऊषा शर्मा पत्नी अमित शर्मा ने बेटी के घर के बाहर खेलने जाने को लेकर मना किया था। बताया जा रहा है कि इसके बाद वह दोनों बच्चों को कमरे में ले गई और दरवाजा बंद कर लिया। कमरे से बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने गेट को धक्का देकर खोला तो अंदर बच्चों और ऊषा को लहूलुहान अवस्था में देखकर स्तब्ध रह गए। अपनी बड़ी बहन और दोनों मासूम बच्चों की हालत देखकर मनीषा बदहवास हो गई। वह रोते हुए दीवार और जमीन पर अपना सिर पटकने लगी। घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने स्थिति संभालते हुए सभी चारों घायलों को खेरली के उपजिला अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में तीनों ने तोड़ा दम
अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के दौरान पांच वर्षीय मुकुल को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, उपचार के दौरान ऊषा और उसकी चार वर्षीय बेटी रितिका ने भी दम तोड़ दिया। गंभीर रूप से घायल मनीषा को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया है। ऊषा का पति अमित शर्मा गुजरात में एक निजी कंपनी में नौकरी करता है, जबकि मनीषा का पति अंकित शर्मा जयपुर के एक निजी अस्पताल में नर्सिंगकर्मी है। घटना की जानकारी ग्रामीणों और परिजनों ने दोनों को दे दी है।
घटना के समय घर पर नहीं थे परिवार के अन्य सदस्य
बताया जा रहा है कि घटना के समय ऊषा के ससुर बृजभूषण शर्मा गांव में चुनाव के दौरान एक प्रत्याशी के प्रचार के लिए गए हुए थे। वहीं, परिवार की सास और ननद, मनीषा और अंकित के दोनों बच्चों को लेकर खेत पर गई हुई थीं। घर में हुई इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सीओ और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जुटाई जानकारी
घटना की सूचना मिलने पर कठूमर सीओ जोगिंदर सिंह राजावत और खेरली थाना पुलिस दांतिया गांव पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और ग्रामीणों से घटनाक्रम के बारे में जानकारी जुटाई। मां और दोनों बच्चों के शव खेरली कस्बे के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाए गए हैं। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटना के पीछे के कारणों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीद से हटाया प्रतिबंध, भारतीय राजनयिक विनय कुमार ने कहा- ऊर्जा आपूर्ति पर हमारा रुख पहले से साफःअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को ट्रेश शुल्कों से राहत देने की घोषणा की है। उन्होंने रूस से जुड़े कई प्रतिबंधो को भी हटाने का ऐलान कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस कानून के जरिए कई सख्त कदम उठाने वाले थे। इस दौरान रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर पूरे 100 फीसदी तक टैरिफ (शुल्क) लगाया जाता। इससे रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों को काफी आर्थिक नुकसान होता, लेकिन रूसी तेल खरीदने के ऐलान के बाद वह इस मामलों में वैश्विक स्तर पर घिरते जा रहे थे। जिसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया।
रूसी तेल खरीद पर क्या बोले भारतीय राजदूत विनय कुमार
रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा कि पश्चिम देशों की आलोचना और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अमेरिकी प्रतिबंधों और यूरोपीय देशों कि टिप्पणी वाले सवाल पर राजदूत ने कहा कि सच्चाई यह है कि 2022 से अब तक यूरोप ने रूस से 320 अरब डॉलर से अधिक के ऊर्जा संसाधन आयात किए हैं, जो भारत और रूस के बीच होने वाले व्यापार से कहीं ज्यादा है।
राजदूत विनय कुमार कहा कि भारत की ऊर्जा खरीद नीति देश की जनता के हितों से तय होती है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हमारे लिए नीति और व्यवहार बिल्कुल स्पष्ट है। भारत के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, विविध स्रोत रखना और इन उत्पादों की अनुमानित आपूर्ति सबसे प्रतिस्पर्धी कीमतों पर हासिल करना। यूक्रेन-रूस संघर्ष शुरू होने के बाद पश्चिम (यूरोप-अमेरिका) भारत रूस के व्यापार पर पैनी निगाह रख रहा है।
यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ FTA पर बातचीत जारी
इस बीच, राजदूत विनय कुमार ने बताया कि भारत रूस और अन्य सदस्य देशों को निर्यात बढ़ाने के लिए यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार साल 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।
एएनआई से बातचीत के दौरान विनय कुमार ने कहा कि साल 2026 के पहले छह महीने में दोनों देशों के बीच 38 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। उन्होंने कहा कि दोनों देश व्यापार में और नए उत्पाद को जोड़ने की कोशिश में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि भारत रूसी अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली मानकों और गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने पर काम कर रहा है, खासकर कृषि और समुद्री उत्पाद क्षेत्रों में।
अमेरिका की दोहरी नीति
बीते दिनों यह खबर सामने आई थी कि अमेरिका अब रूस से डीजल की खरीद करने जा रहा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बातचीत के बाद इस समझौते का ऐलान किया है। इस समझौते के तहत अमेरिका रूस से शुरुआत में करीब 3 लाख टन से ज्यादा डीजल आयात करेगा। फिर नवंबर में 5 लाख टन और उसके तुरंत बाद 10 लाख टन की खेप तय है। रिफाइनरियों की हालत ठीक रहने पर 30 लाख टन और डीजल भेजा जाएगा। अमेरिकी ट्रेजरी के OFAC ने 7 अप्रैल 2027 तक रूसी डीजल के आयात की अस्थायी अनुमति भी जारी कर दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर यानी करीब 6.5 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी हैं। भारत के लिए यह खबर इसलिए अहम है कि वाशिंगटन लंबे समय से रूसी तेल खरीदने पर भारत को टैरिफ और प्रतिबंधों की धमकी देता रहा है। हाल ही में पारित कानून के तहत ऐसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का रास्ता भी खुला है।
कुल मिलाकर अमेरिका का यह कदम रूसी तेल पर उसकी दोहरी नीति को उजागर करता है। भारत के लिए यह कूटनीतिक मोर्चे पर मजबूत तर्क बन गया था, क्योंकि वह शुरू से कहता आया है कि उसके ऊर्जा फैसले राष्ट्रीय हित और सस्ती आपूर्ति पर आधारित हैं।

दिल्ली 17 अक्टूबर2026। महिला पत्रकार ऋचा परासर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने नई दिल्ली जिले के डीसीपी को शिकायत देकर मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के पास प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के दौरान तीन महीने की गर्भवती पत्रकार के साथ बदसलूकी, धमकी और आपराधिक बल का इस्तेमाल किया गया था। शिकायत के मुताबिक, घटना के बाद महिला पत्रकार को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

BNS की इन धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग
ऋचा परासर ने अपनी शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 74, 115(2), 131, 125 और 3(5) के तहत कार्रवाई की मांग की है। धारा 74 महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल के इस्तेमाल से संबंधित है। धारा 115(2) जानबूझकर चोट पहुंचाने की सजा, धारा 131 हमला या आपराधिक बल के इस्तेमाल, जबकि धारा 125 लापरवाही से ऐसा कृत्य करने से जुड़ी है जिससे मानव जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो। धारा 3(5) साझा इरादे से कई लोगों द्वारा किए गए आपराधिक कृत्यों की संयुक्त जिम्मेदारी से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया गया मामला
इस मामले से जुड़ी एक अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है। अर्जी में आरोप लगाया गया कि 12 अक्टूबर को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के मार्च के दौरान राहुल गांधी ने एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया था। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने इस अर्जी का जिक्र किया। उन्होंने इसे अदालत परिसर में मार्च और जुलूसों पर प्रतिबंध से संबंधित लंबित याचिका के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की। भाटिया ने अदालत को बताया कि कथित घटना के समय महिला पत्रकार तीन महीने की गर्भवती थी। पीठ ने अर्जी पर अन्य मामलों के साथ 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई। अब इस मामले में पुलिस की ओर से शिकायत पर की जाने वाली कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई पर नजर रहेगी।

पूर्व मंत्री महेश जोशी फिर जेल से आए बाहर, बोले- पहले भी निर्दोष था और आज भी हूं, JJM पर श्वेतपत्र जारी करने की मांगMahesh Joshi : जल जीवन मिशन मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी शनिवार को जेल से बाहर आ गए। उन्होंने जल जीवन मिशन पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है, वहीं मीडिया से कहा कि वह पहले भी निर्दोष थे और आज भी निर्दोष हैं। उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है, अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे। महेश जोशी ने शनिवार को रिहाई के बाद मीडिया से कहा कि श्वेतपत्र जारी कर स्पष्ट किया जाए, किस सरकार के कार्यकाल में कितने काम हुए और अधिकारियों की क्या जिम्मेदारी थी। उन्होंने एक ही मामले में अलग-अलग गिरफ्तारियों और अदालतों में तथ्यों को अलग-अलग तरीके से पेश करने पर भी सवाल उठाए।
महेश जोशी ने कहा कि जलदाय विभाग के कई मुख्य अभियंता और अन्य इंजीनियर जेल में बंद हैं। इनमें कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिनसे उनकी पहली मुलाकात जेल में हुई। मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण उन्होंने इस पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार किया।
महेश जोशी ने कहा कि ईडी के मामले में गिरफ्तारी के समय उनकी पत्नी कोमा में थीं और गिरफ्तारी के चार दिन बाद उनका निधन हो गया। 7 मई 2026 को जब उन्हें गिरफ्तार कर लिया, उस दिन उनकी शादी की सालगिरह भी थी। उन्होंने सवाल किया कि संबंधित टेंडर में उनकी भूमिका क्या थी और उन्होंने कौन-सा टेंडर पास किया था?
राजस्थान की तुलना पर सवाल
महेश जोशी ने कहा कि जिन राज्यों में ग्रामीण परिवारों का जल कनेक्शन कवरेज 76 से बढ़कर 94 प्रतिशत हो गया, उनकी तुलना 11 से बढ़कर 50 प्रतिशत कवरेज होने वाले राज्यों से कैसे की जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियां और पेयजल संबंधी चुनौतियां अलग हैं। इसके बावजूद उनके कार्यकाल में करीब 40 प्रतिशत कवरेज हासिल किया गया, फिर भी राजस्थान को 27वें, 28वें या 29वें स्थान पर रखा गया।
समय बदलने की उम्मीद
उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों को गिरफ्तार करने की परंपरा उचित नहीं है। ‘आज मैं जद में हूं, खुशगुमां न होना, चिराग उनके भी बुझेंगे, हवा किसी की नहीं।’

कोटा में ASI पर महिला से बदसलूकी का आरोप, गाली-गलौज और मोबाइल छीनने की कोशिश का दावाविरोध करने पर बोला—‘मेरा नाम ASI अरविंद सिंह हाड़ा है’, पुलिस के व्यवहार पर उठे सवाल
कोटा | 17 अक्टूबर 2026 | राष्ट्रीय जनादेश (RJN)
कोटा। राजस्थान के कोटा में एक सहायक उपनिरीक्षक (ASI) पर महिला के साथ कथित रूप से बदसलूकी करने, गाली-गलौज करने और मोबाइल फोन छीनने की कोशिश करने के आरोप सामने आए हैं। घटना से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने आरोप लगाया कि जब उसने पुलिसकर्मी के व्यवहार का विरोध किया, तो उसने अपना नाम ASI अरविंद सिंह हाड़ा बताया। मामले ने पुलिसकर्मियों के आचरण और आम नागरिकों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
महिला ने लगाए गंभीर आरोप
मीडिया रिपोर्ट में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, महिला का आरोप है कि संबंधित पुलिसकर्मी ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और बातचीत के दौरान गाली-गलौज की। महिला ने यह भी दावा किया कि उसका मोबाइल फोन छीनने की कोशिश की गई। जब उसने इसका विरोध किया, तो पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर अपनी पहचान ASI अरविंद सिंह हाड़ा के रूप में बताई।
हालांकि, घटना किन परिस्थितियों में हुई, विवाद की शुरुआत कैसे हुई और उस समय मौके पर अन्य कौन-कौन मौजूद थे, इसकी विस्तृत जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
पुलिसकर्मी के व्यवहार पर सवाल
पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे में किसी पुलिसकर्मी पर बदसलूकी या अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगना गंभीर विषय माना जाता है। पुलिसकर्मियों से अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी परिस्थिति में कानून के दायरे में रहकर काम करें और नागरिकों के साथ मर्यादित व्यवहार करें।
यदि किसी नागरिक को पुलिसकर्मी के व्यवहार से शिकायत है, तो उसकी शिकायत की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है। साथ ही, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पुलिसकर्मी का पक्ष सुनना भी जरूरी है।
क्या होगी विभागीय कार्रवाई?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या महिला की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है और क्या पुलिस प्रशासन ने घटना का संज्ञान लिया है। शिकायत दर्ज होने की स्थिति में संबंधित पक्षों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल उपलब्ध विवरण के आधार पर ASI के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और किसी जांच या कार्रवाई की जानकारी सामने आने पर मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
निष्पक्ष जांच से सामने आए सच्चाई
कोटा की इस घटना में महिला के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की जांच करना आवश्यक है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
राष्ट्रीय जनादेश (RJN) का पक्ष: आम नागरिकों की शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई, पुलिस की जवाबदेही और कानून के अनुरूप कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं। मामले में पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है।





जयपुर में वन-वे व्यवस्था के विरोध में व्यापारियों का प्रदर्शन, 400 दुकानें बंद होने का दावापरकोटे में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने से व्यापारी परेशान, त्योहारों के सीजन में कारोबार पर असर पड़ने की चिंता
जयपुर | 17 अक्टूबर 2026 | RJN राष्ट्रीय जनादेश
जयपुर। राजधानी जयपुर के परकोटा क्षेत्र में वन-वे यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापारियों की नाराजगी सामने आई है। खबर के अनुसार, विरोध के चलते करीब 400 दुकानें बंद रहीं और व्यापारी अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतर आए। व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा यातायात व्यवस्था के कारण बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच प्रभावित हो रही है, जिससे दुकानदारों को कारोबार में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वन-वे व्यवस्था से ग्राहकों की आवाजाही पर असर
व्यापारियों के अनुसार, परकोटा क्षेत्र के बाजारों में खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को यातायात व्यवस्था के कारण परेशानी होती है। रास्तों पर आवाजाही की सीमाओं के चलते कई ग्राहक बाजार तक आने से बचते हैं या खरीदारी के लिए दूसरे बाजारों का रुख कर सकते हैं। व्यापारियों का दावा है कि इसका असर दुकानों की बिक्री पर पड़ रहा है।
जयपुर का परकोटा क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक पहचान और पारंपरिक बाजारों के लिए जाना जाता है। यहां कपड़े, आभूषण, घरेलू सामान, सजावटी वस्तुओं और अन्य उत्पादों की दुकानें बड़ी संख्या में हैं। इन बाजारों में स्थानीय ग्राहकों के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों से भी लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं। ऐसे में यातायात व्यवस्था और ग्राहकों की सुगम आवाजाही व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
त्योहारों के समय व्यापारियों की बढ़ी चिंता
त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद रहती है। दीपावली सहित अन्य त्योहारों के मद्देनजर व्यापारी अपनी बिक्री को लेकर आशान्वित रहते हैं। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि यदि ग्राहक बाजारों तक आसानी से नहीं पहुंच पाएंगे, तो त्योहारों के दौरान होने वाला कारोबार भी प्रभावित हो सकता है।
दुकानदारों की चिंता है कि दुकानें, कर्मचारी और अन्य व्यावसायिक खर्च लगातार बने रहते हैं, जबकि ग्राहकों की संख्या कम होने पर आमदनी पर असर पड़ता है। ऐसे में वे चाहते हैं कि यातायात व्यवस्था को इस तरह लागू किया जाए, जिससे शहर में यातायात का संचालन भी सुचारु रहे और बाजारों में खरीदारी करने आने वाले लोगों को अनावश्यक परेशानी भी न हो।
व्यापारियों की मांगों पर प्रशासन की नजर
व्यापारियों के विरोध के बीच अब यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन के अगले कदम पर नजर रहेगी। व्यापारियों की मांगों और समस्याओं पर संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्रशासन की ओर से किसी अंतिम निर्णय या बदलाव की पुष्टि नहीं है।
इस मामले में एक ओर शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर पुराने बाजारों में व्यापार और ग्राहकों की पहुंच बनाए रखना भी अहम है। दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर समाधान निकालना जरूरी होगा।
अब आगे क्या?
व्यापारियों की प्रमुख चिंता यह है कि परकोटा क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था बने, जिससे जाम और यातायात संबंधी समस्याओं का समाधान हो तथा बाजारों में ग्राहकों का आना-जाना आसान बना रहे। यदि व्यापारियों और प्रशासन के बीच बातचीत के जरिए व्यावहारिक समाधान निकलता है, तो इससे बाजारों के कारोबार और यातायात प्रबंधन दोनों को राहत मिल सकती है।
RJN राष्ट्रीय जनादेश की नजर इस मामले पर बनी रहेगी।
🌐 वेबसाइट: www.rashtriyajanadesh.info





पंचायत चुनाव मे ‘हमारे टिकट बेच दिए’, MLA अनीता जाटव का MLA घनश्याम मेहर पर ‘सौदेबाज़ी’ के आरोपकरौली जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस का अंतर्कलह उजागर। हिंडौन विधायक अनीता जाटव ने टिकट बेचने के लगाए गंभीर आरोप, दो विधायक आए आमने-सामने।
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच करौली जिले से कांग्रेस पार्टी के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान और भारी अंतर्कलह की खबर है। दरअसल, जिला परिषद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन कांग्रेस की ओर से जारी की गई प्रत्याशियों की सूची के बाद पार्टी का यह अंदरूनी विवाद पूरी तरह सरेआम हो गया। हिंडौन से कांग्रेस की महिला विधायक अनीता जाटव ने अपनी ही पार्टी के जिला नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उनके विधानसभा क्षेत्र के दो जिला परिषद वार्डों के टिकटों का सौदा किया गया है। उनके इस बयान के बाद करौली कांग्रेस में दो विधायक आमने-सामने आ गए हैं और राजनीतिक पारे में अचानक उबाल आ गया है।
करौली जिला परिषद सदस्य पद के लिए नामांकन के अंतिम क्षणों में पार्टी ने सभी 35 वार्डों की एक साथ और साझा सूची जारी करने के बजाय जिले के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से टुकड़ों में प्रत्याशियों की घोषणा की। इस प्रक्रिया को लेकर विधायक अनीता जाटव ने असंतोष जताया है। उनका सीधा आरोप है कि भरतपुर संभाग से अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की इकलौती महिला विधायक होने के बावजूद उनकी राजनीतिक अनदेखी की जा रही है और क्षेत्र में स्थानीय विधायक की सहमति के बिना टिकट बांटे जा रहे हैं।
‘सिंबल 5 के ही मिले, 2 वार्डों के टिकटों का हुआ सौदा’
विधायक अनीता जाटव ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की और सीधे तौर पर जिलाध्यक्ष तथा अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया। अनीता जाटव ने बताया कि उनके हिंडौन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जिला परिषद के कुल 7 वार्ड आते हैं, लेकिन उन्हें पार्टी की ओर से केवल 5 वार्डों के ही आधिकारिक सिंबल दिए गए।
उन्होंने बताया कि वार्ड नंबर 31 और वार्ड नंबर 33 के टिकटों को लेकर भारी गड़बड़ी की गई है। विधायक ने बिना किसी लाग-लपेट के सीधा आरोप लगाया कि इन दोनों वार्डों के टिकटों की पीछे से सौदेबाजी की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस अन्याय और भेदभाव के बारे में उन्होंने पार्टी के प्रदेश नेतृत्व और आलाकमान को उच्च स्तर पर पूरी तरह अवगत करा दिया है।
राहुल गांधी देश में ‘वोट चोरी’ का आरोप लगा रहे हैं, उधर राजस्थान में कांग्रेस की विधायक अनीता जाटव अपनी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष और विधायक घनश्याम महर पर पैसे लेकर टिकट बेचने के आरोप लगा रही हैं। #expose
जिलाध्यक्ष हैं टोडाभीम विधायक घनश्याम मेहर
इस गंभीर आरोप और राजनीतिक विवाद के सामने आने के बाद जब कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं टोडाभीम से विधायक घनश्याम मेहर का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनके मोबाइल पर संपर्क नहीं हो सका। टिकट वितरण में क्षेत्रवार सूची पेश किए जाने और विधायकों के बीच आपसी सामंजस्य की कमी को लेकर अब संगठन के भीतर भी सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनावों से ठीक पहले इस तरह विधायकों के बीच खींचतान और सार्वजनिक रूप से टिकट बेचने के आरोप लगने से चुनाव मैदान में कांग्रेस प्रत्याशियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जिला परिषद के 35 वार्डों में कांग्रेस ने इन्हें बनाया उम्मीदवार
विवाद और गहमागहमी के बीच जिला कलेक्ट्रेट में रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष कांग्रेस विधायकों, पूर्व विधायकों और पार्टी द्वारा अधिकृत पदाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के उम्मीदवारों की अंतिम सूची जमा कराई। कांग्रेस द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची इस प्रकार है:
- वार्ड 1: छोट्या राम
- वार्ड 2: प्रेम
- वार्ड 3: राजबहादुर
- वार्ड 4: रजो
- वार्ड 5: सविता मीना
- वार्ड 6: कविता
- वार्ड 7: मनसिंह
- वार्ड 8: सूरज सिंह
- वार्ड 9: सम्पति देवी
- वार्ड 11: मधुलता
- वार्ड 12: गुमान सिंह
- वार्ड 13: कुमेर
- वार्ड 24: पुष्पेंद्र मीणा
- वार्ड 25: अनीता
- वार्ड 26: शरदो देवी
- वार्ड 27: रिंकी देवी
- वार्ड 28: करणसिंह जाटव
- वार्ड 29: थानसिंह
- वार्ड 30: ममता
- वार्ड 32: बबीता
- वार्ड 33: माया देवी
- वार्ड 34: सीमा
- वार्ड 35: डोडीराम
चुनाव प्रचार से पहले ही गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस
करौली जिले में जिला परिषद चुनाव के ठीक मुहाने पर इस तरह का सियासी घमासान सामने आने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हुआ है। एक तरफ जहां बीजेपी पूरे जिले में लामबंद होकर चुनाव मैदान में उतर चुकी है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज नेताओं और विधायकों के बीच चल रही यह खींचतान चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह होगा कि पार्टी आलाकमान विधायक अनीता जाटव की शिकायत पर क्या कदम उठाता है।

जंतर-मंतर के विरोध प्रदर्शन पर राष्ट्र सेविका समिति प्रमुख वी. शांता कुमारी का हमला, बोलीं— ‘जेन-जी का ब्रेनवॉश कर रहा दिमागी नक्सलवाद’युवाओं और महिलाओं को अपने फायदे के लिए भड़काने का लगाया आरोप, प्रदर्शन को लेकर बयान से चर्चा तेज
नई दिल्ली | राष्ट्रीय जनादेश ब्यूरो
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े महिला संगठन राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख वी. शांता कुमारी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रदर्शनों के जरिए अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही उन्होंने ‘दिमागी नक्सलवाद’ का जिक्र करते हुए कहा कि जेन-जी यानी युवा पीढ़ी का ब्रेनवॉश किया जा रहा है।
वी. शांता कुमारी ने अपने बयान में दावा किया कि कुछ लोग अपने हितों को साधने के लिए युवाओं और महिलाओं को प्रभावित करने तथा उन्हें भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। उनके बयान ने जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों, युवा भागीदारी और सामाजिक आंदोलनों की भूमिका को लेकर चर्चा को हवा दी है।
जेन-जी को लेकर क्या कहा?
आज की जेन-जी पीढ़ी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया का व्यापक इस्तेमाल करती है। ऐसे में युवाओं की आंदोलनों में भागीदारी और उनकी विचारधारा को लेकर अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।
राष्ट्र सेविका समिति प्रमुख ने अपने बयान में युवाओं को प्रभावित किए जाने का आरोप लगाया। हालांकि, उनके दावे के समर्थन में कौन-से विशिष्ट प्रमाण या घटनाएं हैं, इसकी पुष्टि के लिए बयान की पूरी पृष्ठभूमि और संबंधित तथ्यों की जांच जरूरी है।
महिलाओं की भागीदारी पर भी उठाए सवाल
वी. शांता कुमारी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने फायदे के लिए महिलाओं और युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान के संदर्भ में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि वह किन प्रदर्शनों, संगठनों या गतिविधियों की बात कर रही थीं।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों की अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। वहीं, किसी भी प्रदर्शन में हिंसा, उकसावे या भ्रामक जानकारी से जुड़े आरोपों का मूल्यांकन ठोस तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
अब किन बातों पर रहेगी नजर?
राष्ट्र सेविका समिति प्रमुख के बयान के बाद जंतर-मंतर पर संबंधित प्रदर्शनों के आयोजकों की प्रतिक्रिया और लगाए गए आरोपों के समर्थन में उपलब्ध तथ्यों पर नजर रहेगी। प्रदर्शन का उद्देश्य, आयोजकों का पक्ष और संबंधित घटनाक्रम सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
राष्ट्रीय जनादेश की बात: जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों की राष्ट्र सेविका समिति प्रमुख वी. शांता कुमारी द्वारा की गई आलोचना ने युवाओं की भागीदारी और सामाजिक आंदोलनों की भूमिका को लेकर बहस को सामने ला दिया है। आरोपों और तथ्यों के बीच अंतर समझना इस पूरे मामले में जरूरी है।
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