बोले—MDR शुल्क वापस नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज, डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त बोझ मंजूर नहीं
नई दिल्ली/जयपुर। UPI भुगतान पर प्रस्तावित MDR (Merchant Discount Rate) शुल्क को लेकर व्यापारियों का विरोध तेज होता जा रहा है। शुल्क के विरोध में व्यापारिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और सरकार से प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था को वापस लेने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि UPI आज छोटे-बड़े कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होने से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी और इसका असर कारोबार पर पड़ेगा।
व्यापारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि MDR शुल्क वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कई स्थानों पर व्यापारियों ने विरोध दर्ज कराते हुए सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
‘नो UPI डे’ के जरिए जताया विरोध
MDR के विरोध में व्यापारियों की ओर से ‘नो UPI डे’ का आह्वान भी किया गया। व्यापारियों का कहना है कि विरोध का उद्देश्य ग्राहकों को परेशानी में डालना नहीं, बल्कि सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना है। उनका तर्क है कि UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाया है, इसलिए इस व्यवस्था पर ऐसा शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए जिससे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़े।
छोटे कारोबारियों पर असर की चिंता
व्यापारियों का कहना है कि छोटे दुकानदारों और रोजाना बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान लेने वाले कारोबारियों के लिए मामूली शुल्क भी लंबे समय में बड़ा खर्च बन सकता है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय यदि शुल्क लगाया गया तो व्यापारी नकद भुगतान की ओर लौटने पर मजबूर हो सकते हैं।
सरकार की शुल्क व्यवस्था को लेकर स्थिति
MDR को लेकर सामने आई व्यवस्था में ₹2,000 तक के पात्र P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी UPI लेनदेन पर शून्य MDR का प्रावधान बताया गया है। वहीं निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेनदेन पर शुल्क व्यवस्था लागू होने की बात सामने आई है। P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति UPI भुगतान मुफ्त रहने की बात भी कही गई है।
इसी शुल्क व्यवस्था को लेकर व्यापारी संगठनों और सरकार के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। व्यापारी संगठनों की मांग है कि व्यापारियों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त MDR बोझ नहीं डाला जाए।
आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी
व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांग पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। संगठनों का कहना है कि व्यापारी लंबे समय से डिजिटल भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्होंने UPI को स्वीकार कर देश में कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दिया है। इसलिए अब शुल्क के रूप में अतिरिक्त आर्थिक भार डालना उचित नहीं है।
व्यापारियों ने सरकार से MDR शुल्क वापस लेने और UPI भुगतान व्यवस्था को व्यापारियों के लिए शुल्क-मुक्त बनाए रखने की मांग दोहराई है।
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